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इस शख्‍स ने बचाई थी राष्‍ट्रपिता की अंग्रेजों से जान

Prem Ranjan | News18Hindi
Updated: April 16, 2017, 8:46 AM IST
Prem Ranjan | News18Hindi
Updated: April 16, 2017, 8:46 AM IST
बहुत कम ही लोग ही ये जानते होंगे कि बिहार के बेतिया जिले में गौनाहा स्थित परसौनी गांव के एक शख्स ने  वर्ष 1917  में  महात्मा गांधी की जान बचाई थी.

महात्मा गांधी की जान बचाने वाले इस देशभक्त का नाम बत्तक मियां था, जिन्होंने अंग्रेजों की साजिश को विफल करते हुए राष्ट्रपिता की जान बचाई.

आज इस देशभक्त की तीसरी पीढ़ी मुफ़लिसी में जिंदगी बसर करने को मजबूर है. आज हालात यह हैं कि उनका परिवार दूसरे राज्य में जाकर मजदूरी करने को मजबूर है.

यही नहीं इस शख्‍स को तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति राजेन्‍द्र प्रसाद  ने गांधीजी की जान बचाने की एवज में जो इनाम दिया था वह भी इस परिवार को पूरी तरह से आज तक नहीं मिला.

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ज्ञात हो कि अंग्रेजों की मोतिहारी स्थित नील फैक्ट्री के मैनेजर इरविन ने महात्मा गांधी की हत्या की साजिश रची थी. इरविन ने गांधीजी को खाने पर बुलाकर दूध में जहर देने की योजना बनाई थी. उस समय बत्तक मियां इरविन के रसोईए थे.

बत्तक मियां के पोते कलाम अंसारी के अनुसार वो अपने दादा जी को नहीं देख पाए लेकिन पिता जान अंसारी पूरी कहानी बताते थे.

उनके अनुसार वर्ष 1917 में गांधी जी चंपारण आये थे तो एक अंग्रेज अधिकारी ने उनके दादा को गांधी को दूध में जहर पिलाने की बात कही. दादा जी को धमकी के साथ साथ लालच भी दिया गया.

मेरे दादा अंग्रेज अधिकारी के यहां खाना बनाने का काम करते थे. लेकिन दादा ने नहीं माना और जोर-जबरदस्ती कर उन्हें गांधी को जहर वाला दूध लेकर भेजा गया.

बत्तख मियां ने गांधी को दूध देते ही बता दिया कि इसमें जहर है लिहाजा उन्होंने नहीं पिया और फेंक दिया. बाद में एक बिल्ली उस दूध को पी गई और उसकी मौत हो गई.

कलाम अंसारी के अनुसार इस घटना के गवाह राजेंद्र प्रसाद और दूसरे लोग भी थे

इस घटना के बाद अंग्रेज अधिकारी ने उन्हें जेल भेज दिया और परिवार के सात बीधा 12 कट्टा और 2 धूर जमीन के साथ साथ 5 भैंस को नीलाम कर दिया है. घर की स्थिति इससे बेहद खराब हो गई.

1950 में जब डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मोतिहारी आए तो उन्होंने बत्तक मियां को 24 एकड़ जमीन देने की घोषणा की.

परिवार की जमीन पर वन विभाग ने किया कब्जा

कलाम अंसारी के अनुसार उनके परिवार को 35 बीघे जमीन दी गई थी. लेकिन उनके परिवार के पास सिर्फ तीन बीघे की जमीन है और ये जमीन भी नदी में चली गई है. उनके अनुसार इसके अलावा करीब 20 साल पहले तक 9 बीघे दूसरी जमीन पर उनका परिवार खेती करता था लेकिन वन विभाग अब उस पर कब्जा कर चुका है. बाकी किसी जमीन का अता पता नहीं है. कलाम अंसारी के अनुसार बत्तक मियां का पूरा परिवार 10 कट्टे की जमीन पर रहता है जो कभी भी डरहा नदी में समां सकती है.

पश्चिमी चंपारण के डीएम लोकेश सिंह ने न्यूज़18 हिंदी से कहा कि बत्तक मियां का परिवार यहां एक्वा और परसौनी गांव में रहता है लेकिन वर्तमान में उनके परिवार की जमीन का स्टेटस क्या है. इसकी जानकारी नहीं है. हमने अपने अधिकारियों को इस संबंध में पता करने के लिए कहा है. उन्होंने इस संबंध में पूर्वी चंपारण प्रशासन से संपर्क करने की बात कही.

जब न्यूज18 हिंदी ने पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी अनुपम कुमार के बात की तो उन्होंने कहा कि बत्तक मियां पूर्वी चंपारण के बजरंगिया ब्लॉक के अदरगी के निवासी थे लेकिन उनका पूरा परिवार पश्चिमी चंपारण शिफ्ट कर गया है और वहीं उनको जमीन दी गई थी. हम लोग बत्तक मियां की वंशावली और दूसरी तमाम जानकारियां इकट्ठा करा रहे हैं.

बत्तक मियां के पोते कलाम अंसारी के मतुाबिक करीब चार महीने पहले मोतिहारी डीएम के यहां से एक पदाधिकारी आया और कहा कि राष्ट्रपति के यहां से पत्र आया है और आपको जमीन दी जाएगी लेकिन इस संबंध में अभी कुछ भी नहीं किया गया है. हमें 41 एकड़ जमीन देने बात कही गई थी.
First published: April 16, 2017
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