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रामनाथ कोविंद ने ठुकरा दी थी यूपीएससी की नौकरी, कुछ ऐसा है उनका करियर

Alok Kumar | News18Hindi
Updated: June 19, 2017, 9:28 PM IST
Alok Kumar | News18Hindi
Updated: June 19, 2017, 9:28 PM IST
राम नाथ कोविंद का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की (वर्तमान में कानपुर देहात जिला), तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था. कोविंद का सम्बन्ध कोरी या कोली जाति से है जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है.

वकालत की उपाधि लेने के पश्चात दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत प्रारम्भ की. वह 1977 से 1979 तक दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे. 8 अगस्त 2015 को बिहार के राज्यपाल के पद पर नियुक्ति हुई.

वर्ष 1991 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये. वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश राज्य से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए. वर्ष 200 में पुनः उत्तरप्रदेश राज्य से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए. इस प्रकार कोविंद लगातार 12 वर्षें तक राज्यसभा के सदस्य रहे. वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुके हैं.

कोविंद बीजेपी दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कोली समाज अध्यक्ष भी रहे. वर्ष 1976 में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्युरो के महामंत्री भी रहे.

कानपुर देहात की डेरापुर तहसील के गांव परौंख में जन्मे रामनाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट में वकालत से कॅरियर की शुरुआत की. वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद वह तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई के निजी सचिव बने. इसके बाद भाजपा नेतृत्व के संपर्क में आए.

घाटमपुर से लड़ चुके हैं लोकसभा चुनाव
कोविंद को पार्टी ने वर्ष 1990 में घाटमपुर लोकसभा सीट से टिकट दिया लेकिन वह चुनाव हार गए. वर्ष 1993 व 1999 में पार्टी ने उन्हें प्रदेश से दो बार राज्यसभा में भेजा. पार्टी के लिए दलित चेहरा बन गये कोविंद अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रवक्ता भी रहे.

घाटमपुर से चुनाव लड़ने के बाद कोविंद लगातार क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं से संपर्क में रहे. राज्यसभा सदस्य के रूप में क्षेत्र के विकास में लगातार सक्रिय रहने का ही परिणाम है कि उनके राज्यपाल बनने की खबर सुनते ही लोग फोन पर बधाई देने लगे.

वर्ष 2007 में पार्टी ने उन्हें प्रदेश की राजनीति में सक्रिय करने के लिए भोगनीपुर सीट से चुनाव लड़ाया, लेकिन वह यह चुनाव भी हार गए.

आईएएस परीक्षा में तीसरे प्रयास में मिली थी सफलता
परौख गांव में 1945 में जन्मे रामनाथ कोविद की प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर ब्लाक के ग्राम खानपुर परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय हुई. कानपुर नगर के बीएनएसडी इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद डीएवी कॉलेज से बी कॉम व डीएवी लॉ कालेज से विधि स्नातक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद दिल्ली में रहकर आईएएस की परीक्षा तीसरे प्रयास में पास की.

मुख्य सेवा के बजाय एलायड सेवा में चयन होने पर नौकरी ठुकरा दी. जून 1975 में आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार बनने पर वे वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव रहे थे. जनता पार्टी की सरकार में सुप्रीम कोर्ट के जूनियर काउंसलर के पद पर कार्य किया.

मकान को बना दिया बारातशाला
बिहार के राज्यपाल बनाए गए रामनाथ कोविद तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं. परौख गांव में कोविद अपना पैतृक मकान बारातशाला के रूप में दान कर चुके हैं. बड़े भाई प्यारेलाल व स्वर्गीय शिवबालक राम हैं.
First published: June 19, 2017
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