डेढ़ साल से सऊदी अरब में फंसे परशुराम के 5 नाबालिग बच्चों को है पापा का इंतजार

ETV Bihar/Jharkhand

Updated: February 17, 2017, 7:57 PM IST
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अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए हमारे देश से हर साल हजारों की संख्या में लोग खाड़ी देशों में नौकरी करने जाते हैं. कुछ यही मंशा लेकर सीवान का परशुराम मांझी सऊदी अरब का जेदा गया लेकिन एजेंट की धोखाधड़ी का शिकार होकर पिछले डेढ़ साल से वह वहां फंसा हुआ है.

सीवान के बसंतपुर प्रखंड के बभनौली गांव निवासी चंद्रेश्वर मांझी और भागमनी देवी के एकलौते बेटे परशुराम मांझी अच्छी नौकरी कर अपने घर की माली हालत सुधारने की गरज से डेढ़ साल पहले जूलाई 2015 में सऊदी अरब के जेदा गया. लेकिन, परशुराम को विदेश में नौकरी के नाम पर भेजने वाले एजेंट ने धोखाधड़ी कर उसे टूरिस्ट वीजा पर जेदा भेज दिया.

डेढ़ साल से सऊदी अरब में फंसे परशुराम के 5 नाबालिग बच्चों को है पापा का इंतजार
सउदी अरब में फंसे परशुराम मांझी का परिवार ( News18)

अपने बेटे की वापसी के लिए उसके बूढ़े माता-पिता काफी चिंतित और परेशान हैं. अपनी समझ के अनुसार हर सक्षम व्यक्ति के पास वे उसकी वापसी की गुहार लगा चुके है. परशुराम मांझी के पिता चंद्रेश्वर मांझी का कहना है कि  तीन महीने तक उसने एक ठेकेदार के अंदर में मजदूरी का काम किया और तीन महीने बाद वीजा खत्म होने पर ठीकेदार ने उसे काम से निकाल दिया जिसके बाद से वह जेदा में ही फंसा हुआ है और जैसे तैसे भीख मांग कर वहां अपना जीवन जी रहा है.

रोजगार के लिए विदेश गए परशुराम मांझी के घर में उसके बूढ़े माता-पिता के अलावा उसकी पत्नी सहित पांच छोटे-छोटे बच्चे भी हैं. घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य के विदेश में फंसने के बाद उनके घर की माली हालत काफी ही खराब हो चुकी है. जहां परशुराम विदेश में भीख मांगकर अपना जीवन बिता रहा है. वहीं उसके परिजन गांव में अगल-बगल के लोगों के रहमो-करम पर किसी तरह अपना गुजर-बसर कर रहे हैं.

परशुराम मांझी की पत्नी सुनैना देवी का कहना है कि उनके पति को विदेश भेजने वाला गांव के ही मुखिया नजीर मियां की बहन नाजरा खातून है जिसने विदेश भेजने के नाम पर परशुराम और उसके परिवार से काफी रुपये लिये थे और जिसे देने के चक्कर में उनकी सारी जमीन-जायदाद भी बिक गयी. वहीं अब मुखिया और उसकी एजेंट बहन भी मदद नहीं कर रहे हैं.

बहरहाल, गैर मुल्क में फंसे परशुराम मांझी के बेबस और लाचार पारिवार को अब मीडिया से आस जगी है और परिवार के लोग अपनी फरियाद विदेश मंत्रालय और भरतीय दूतावास तक पहुंचाना चाहते हैं.

First published: February 17, 2017
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