छुट्टी लेना, न मिले तो जॉब छोड़ देना, बंद कर देना धंधा, लेकिन नवरात्रि में यहां जाना जरूर..!

मोहम्मद शफी शम्सी

First published: September 30, 2016, 3:31 PM IST | Updated: September 30, 2016, 4:21 PM IST
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छुट्टी लेना, न मिले तो जॉब छोड़ देना, बंद कर देना धंधा, लेकिन नवरात्रि में यहां जाना जरूर..!
देश में कल से यानी की 1 अक्‍टूबर से नवरात्र उत्‍सव शुरू होने जा रहा है। आप हर साल नवरात्रि...

देश में कल से यानी की 1 अक्‍टूबर से नवरात्र उत्‍सव शुरू होने जा रहा है। आप हर साल नवरात्रि की पूजा देखते आ रहे हैं, लेकिन यदि आप नवरात्रि में देश की इस जगह पर  नहीं गए हैं, तो जरूर जाइए क्‍योंकि दुर्गापूजा पर ऐसा नजारा आपने कहीं नहीं देखा होगा।

दरअसल, हम बात कर रहे हैं पश्‍चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की। दुर्गापूजा के दौरान आपने कोलकाता का नाम हमेशा सुना होगा। पांच दिन यहां सब कुछ बदल जाता है। तो ऐसा क्या होता है, इन पांच दिनों में कि देश और विदेश के हर कोने में रहने वाला, अगर वो कोलकाता में जन्मा है, तो यहां पूजा की छुट्टियां बिताना चाहता है? कोलकाता की तहज़ीब अजीब है। समझना हो इस बार यहां आ जाइए।

शहर की हर गली, हर मोहल्ला इन छुट्टियों में जुड़ जाता है एक कभी-न-खतम होने वाले उत्सव में। जगह-जगह पूजा-पंडाल बनते हैं और लोग बस निकल पड़ते हैं घूमने। सुबह, दोपहर, शाम या रात – यहां समय देखने का समय नहीं होता। हमारे लिए छुट्टी बड़ी चीज़ है, अगर मिल जाए तो यार-दोस्त और बस घूमना। इन छुट्टियों में भी कुछ ऐसा ही होता है। धार्मिक आस्थाओं के साथ होती है बहुत सी खुशी भी। खुशी अपने बिछड़े यारों से मिलने की, जो दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु या फिर विदेशों से घर लौटे हों।

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अगर आप दिल्ली में रहते हैं, तो संभवत: चित्तरंजन पार्क इलाके में दुर्गा पूजा के आयोजन के बारे में आपने सुना होगा? वैसे एक और जगह भी दुर्गा पूजा आप हमारे यहां वाले ढंग में मनाते लोगों को देख सकते हैं। वो इलाका है दिल्ली का लक्ष्मीनगर। छोटे-स्तर पर सही, वहां भी कोलकाता का माहौल बनता है।

सारे त्यौहारों पर कपड़े, मिठाई, खाना-पीना लाज़मी है। दुर्गापूजा में कुर्ता-पाजामा जिसे ‘पंजाबी-पाजामा’  भी कहते हैं यहां। या फिर कुर्ता-धोती काफी लोग पहनते हैं। महिलाओं के लिए साड़ी पसंदीदा होती है।

 

अगर आप घड़ी देख-देख कर काम करने के आदी हैं तो ज़रा संभाल लीजिए खुद को। वक़्त को ठहर जाने दीजिए। और कभी-न-खतम होने वाले इस समय का आभास कीजिए कोलकाता में। कुछ तो गाड़ी से उतर कर चलिए। खुशी खुद ही चेहरे पर छा जाएगी। दोस्त नहीं भी हैं, तो हो जाएंगे। ज़िंदगी का जब-वी-मेट मोमेंट यही शहर है।

मिलिए मेरे प्यारे कोलकाता से। जिसकी रगों में हम बसते हैं। जो हमारी रगों में बसता है। बस कुछ ही दिन और हैं। शामिल होइए हमारी इस अजीब तहज़ीब में। भाषाओं के मोतियों की माला अगर आप को पेश करें तो यों कहेंगे – आशुन, कोलकाता विच आपका स्वागतम!

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