रक्षा बंधन विशेष : कविता : सलामती की दुआ करती रहूंगी मैं

शालिनी तिवारी

First published: August 18, 2016, 10:26 AM IST | Updated: August 18, 2016, 10:39 AM IST
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रक्षा बंधन विशेष :  कविता :  सलामती की दुआ करती रहूंगी मैं
तुम्हारी कलाइयों में रक्षा की राखी, बरस दर बरस मैं बांधती रहूंगी, दिल में उमंगे और चेहरे पर खुशियां, हर...

तुम्हारी कलाइयों में रक्षा की राखी,

बरस दर बरस मैं बांधती रहूंगी,

दिल में उमंगे और चेहरे पर खुशियां,

हर एक पल मैं सजाती रहूंगी,

 

कभी तुम न तन्हा स्वयं को समझना,

कदम से कदम मैं मिलाती रहूंगी,

तुम हर इक दिन आगे बढ़ते ही रहना,

सलामती की दुआ मै करती रहूंगी।

खुदा ने हम दोनों का ये रिश्‍ता बनाया,

शुक्रिया उसको अदा करती रहूंगी,

लम्बी उमर दे और रण में विजय दे,

हमेशा ये कामना करती रहूंगी,

 

जन्म दर जन्म हम मिले साथ-साथ,

भइया मै बहना बनती रहूंगी,

जीवन में नेकी हरदम करते रहो तुम,

सलामती की दुआ मैं करती रहूंगी।

 

हर एक दिन इतिहास रचते ही जाना,

प्रेम की स्याही से मै लिखती रहूंगी,

समय भी गवाही ये देगा सदा ही,

रिश्‍ते की मिशाल मै बुनती रहूंगी,

 

अपनों के संग रक्षाबन्धन की खुशियां,

राखी बांधकर मनाती रहूंगी,

भइया अपना प्यार हमेशा देते ही रहना,

सलामती की दुआ मैं करती रहूंगी।

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