बॉब डिलन को साहित्‍य का नोबेल : लोकस्‍मृति का एक लोक और जनगायक, वैसा, जैसे हमारे यहां आल्‍हा..!

सुशोभित सक्‍तावत

First published: October 13, 2016, 5:54 PM IST | Updated: October 13, 2016, 6:14 PM IST
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बॉब डिलन को साहित्‍य का नोबेल : लोकस्‍मृति का एक लोक और जनगायक, वैसा, जैसे हमारे यहां आल्‍हा..!
वर्ष 2016 के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार अमेरिका के जाने-माने गीतकार और गायक बॉब डिलन को दिया गया है।...

वर्ष 2016 के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार अमेरिका के जाने-माने गीतकार और गायक बॉब डिलन को दिया गया है। पूरी दुनिया मेंअपने अनूठे लोक गीतों के लिए लोकप्रिय बॉब साठ के दशक में लोकगीतों के रॉक स्टार के रूप में जाने जाते थे। गिटार पर अपनी उंगलियों की शानदार थिरकन और ऐसे ही माउथऑर्गन के साथ संगीत की दुनिया में दस्‍तक देने वाले बॉब डिलन केवल अमेरिका ही नहीं बल्‍कि पूरी दुनिया के चेहते रहे हैं।

1941 में जन्‍मे और महज 18 साल की उम्र में संगीत के सुरों को अपना बना लेने वाले बॉब को लेकर प्रस्‍तुत है युवा लेखक सुशोभित सक्‍तावत का  यह बेहद रोचक लेख। यह लेख बॉब की न केवल पूरी संगीत पृष्‍ठभूमि से परिचित कराता है, बल्‍कि यह भी  बताता है कि रॉक और पॉप के बीच लोकधुन का यह जादूगर कैसे अपनी अनूठी धुन से पूरी दुनिया पर छाया रहा। विश्‍व सिनेमा ,साहित्‍य, संगीत और फोटाग्राफी  पर सुशोभित की कलम भी वैश्‍विक लोकधुन ही रचती है।

हाऊ डज़ इट फ़ील, मिस्टर टैंबूरिन मैन?

बॉब डिलन के गायन की तुलना किसी भी लोकप्रिय रॉक या जैज़ गाने से नहीं की जा सकती। उसके गायन की तुलना केवल लोकगायकों और जनगायकों से की जा सकती है। उसके गीतों की तुलना लोकस्मृति में रचे-बसे आल्हा और बिरहे से की जा सकती है। उसे सुनते हुए पॉल रॉब्सन के रेडिकल राजनीतिक तराने या लोर्का के जिप्सी बैलेड्स याद आते हैं। बॉब, गायक से बढ़कर एक कवि है, वॉल्ट विटमैन की तरह वह स्वयं का उत्सव मनाता है और दूर्वाओं पर हस्ताक्षर करता चलता है।

1965 में जब डिलन का गीत "लाइक अ रोलिंग स्टोन" आया, तो लगा, जैसे किसी ने ठोस हवा की दीवार में मुक्का मारकर उसमें छेद कर दिया हो। बूर्ज्वा संस्कृति के प्रति जिस हिकारत से दांत पीसते हुए डिलन ने यह गीत गाया, उसने मौजूदा काउंटर कल्चरल मूवमेंट को एक नई भंगिमा दी। डिलन के साथ मानो एक पूरी नस्ल पतनशील सभ्यता से पूछ रही थी : "हाऊ डज़ इट फ़ील, टु बी विदाउट होम, लाइक अ रोलिंग स्टोन?"

पश्चिमी पॉप संगीत की परंपरा में रिदम एंड ब्ल्यू और रॉक एन रोल के साथ ही कंट्री और फ़ोक संगीत की भी एक सजीव अंतर्धारा हमेशा प्रवाहित रही। बॉब डिलन के साथ कंट्री संगीत एक अनन्य आधुनिक भावबोध ग्रहण करता है। डिलन के बैलेड्स में बीटनिक कवि एलेन गिंसबर्ग और कंट्री सिंगर जीम रीव्ज एक साथ गा रहे थे।

गिटार और माउथ ऑर्गन उसके संगी-साथी थे। आज़ाद हवा उसके गेसुओं में गिरहें गूंथती। काले चश्मे के नीचे छुपी उसकी आंखों में उसके लहज़े का तंज दबा-छुपा रहता, लेकिन उसकी आवाज़ उसके भीतर पैठी इंटेंसिटी को छुपा न पाती। फ्रैंक सिनात्रा, बिल विदर्स और पॉल मैकार्टनी की सुरीली आवाज़ के अभ्यस्त कानों ने ऐसी आवाज़ पहले कभी न सुनी थी। अनगढ़ और खरी। गले में खरज। लोअर ओक्तेव को सहलाता खुरदुरा लहजा। सैम कुक ने उसकी आवाज सुनकर कहा था : बॉब के पदार्पण के साथ ही संगीत में सुरीली आवाज़ों का एकाधिकार समाप्त होता है और सच्ची आवाज़ों का सफ़र शुरू होता है।

"ब्लोइन इन द विंड" और "टाइम्स दे आर अ-चेंजिन" जैसे उसके गीत युद्ध विरोधी मुहिमों के एंथम बन गए। "ब्लोइन इन द विंड" में वह एक सफेद फाख्ते से, जैसे मनुष्य की नियति से, पूछता है : "रेत में सो जाने से पहले, और कितने समुद्र पार करने होंगे तुम्हें?" और फिर ख़ुद इसका उत्तर देता है : "हवाओं पर लिखा है इसका जवाब।" हवाओं के बदलते रुख़ पर उसकी नजर थी और वह ख़ुद हवाओं का रुख़ बदल रहा था।

बॉब डिलन की आवाज़ की ख़राशों में "मिनेसोटा डाउन" से "मिसिसिपी डेल्टा" तक की सड़क चमकती है, "हाईवे 61", जो कि उसके संगीत का जनपथ है। उसने पॉप गीतों को विशुद्ध कविता की ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। लेकिन उसके जीनियस को किसी एक कोष्ठक में बांधना संभव नहीं। वह लोकरंजक होने के साथ ही लोकद्रोही भी है। वह आधुनिक होने के साथ ही आधुनिकता का आलोचक भी है।

रॉबी रॉबर्टसन ने उसके बारे में सच ही कहा था : वह विद्रोहों के विरुद्ध विद्रोह कर रहा विद्रोही था। बॉब डिलन संगीत की दुनिया का मार्लन ब्रांडो है। उसने एक नई भंगिमा रची। उसने अपने वर्तमान को भविष्य की भाषा सौंपी।

बॉब डिलन के गीतों के साथ पली-बढ़ी पीढ़ी के लिए उसके गीत दिसंबर की दरमियानी धूप की तरह हैं, जो शहरों को शीशे के कशीदों में बदल देती है, एक चमक और ऊष्मा के साथ। जब-जब यह करिश्मा छीजता है, जी करता है बॉब के पास जाएं और उसके ही शब्दों में उससे कहें : "सांझ का साम्राज्य अब रेत के ढूहों में बिला गया है और पुरानी-खाली सड़कें स्वप्नों के सीमांतों से सुदूर हैं। लेकिन हमारी आंखों में नींद नहीं। 2016 के साहित्‍य के इस महान पुरस्‍कार के लिए तुम्‍हे ढेरों बधाई मिस्टर टैंबूरिन मैन..! अब तो कोई गीत सुनाओ..."

(फोटो : Getty Images)

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