'कैशलेस' खौफ से परेशान हैं बस्तर के लोग, जबरन वसूला जा रहा सर्विस चार्ज

Vinod Kushwaha | ETV MP/Chhattisgarh

Updated: February 17, 2017, 9:34 PM IST
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नोटबंदी के बाद लोगों को कैशलेस व्यवस्था के जरिए लेनदेन करने के लिए सरकार अपील कर रही है. यह भले ही एक अच्छी सोच और अच्छी पहल हो, लेकिन इससे होने वाले तकनीकी दिक्कतों ने लोगों को मुसीबत में डाल दिया है.

बैंकों की पॉलिसी के चलते कैशलेस लेनदेन करने वाले लोगों की जेब ढीली हो रही है, जिसका चौतरफ विरोध हो रहा है. कैशलेस की तरफ कदम बढ़ा रहे लोग बढ़ती परेशानी को जल्द से जल्द दूर करने की मांग कर रहे हैं.

आदिवासी बहुल बस्तर में जहां लोग अभी ठीक ढंग से कैशलेस का सही मतलब नहीं समझ पाए हैं, उनके लिए बैंकों की तरफ से वसूली जा रही सर्विस चार्ज उनकी जेब ढीली करनी शुरू कर दी है. नोटबंदी के बाद नोटों की तंगी झेल रहे लोगों ने तो सोचा था कि कैशलेस व्यवस्था से रुपयों के आदान-प्रदान करने में राहत मिलेगी और जेब में पैसे लेकर नहीं चलना पड़ेगा. डेबिट और क्रेडिट कार्ड के जरिए खरीददारी करने पर लगने वाले सर्विस चार्ज ने उनकी सोच को बदलने पर मजबूर कर रहा है.

बिजली का बिल चुकाने की बात हो या फिर पेट्रोल-डीजल खरीदने की, सभी लेनदेन में कैशलेस व्यवस्था लागू कर दिया गया है. लोगों ने सरकार की इस योजना के साथ चलना भी शुरू कर दिया, लेकिन परेशानी तब हुई जब जगदलपुर में एक ट्रक मालिक को 11 हजार 500 रुपये का डीजल खरीदने पर उसे 11,829 रुपये देने पड़ गए. यह वाक्या उनके साथ अलग-अलग दिन पांच बार हुआ.

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सर्विसचार्ज या बैंक चार्ज के तौर में कट रहे अधिक पैसे लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुका है. यही वजह है कि लोग कैशलेस को अच्छा नहीं मान रहे हैं. आम लोगों से लेकर दुकानदार सभी इसे अच्छा तो मान रहे हैं, लेकिन इसमें कई तरह की खामिंया भी गिना रहे हैं.

ब्रज लाल जैसे लोगों का मानना है कि अगर टैक्स के रूप में महीने में तीन हजार रुपये सर्विस चार्ज के तौर पर उपभोक्ताओं से लिए जाएंगे तो यह उसके लिए नुकसान देने वाली बात है. इसलिए लोग सरकार से इस व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं.

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इस मामले में जिला प्रशासन कुछ अलग तरह की दलील पेश कर रहा है. जिला कलेक्टर अमित कटारिया का मानना है कि अगर बैंक उपभोक्ता से ऐसा कोई चार्ज ले रहे है तो वह पूरी तरह से गलत है. जिला प्रशासन की दलीलों के बीच बैंकों की मनमानी के आगे बस्तर के आम उपभोक्ता परेशान हैं. लोग मान रहे हैं कि नोटबंदी की मार के बाद सर्विस टैक्स के नाम पर बैंकों की जो मनमानी चल रही है उस पर हर हाल में अंकुश लगनी चाहिए. इसके बाद ही कैशलेस व्यवस्था सफल हो पाएगी.

First published: February 17, 2017
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