बस्तर में मिली 1400 साल पुरानी बुद्ध प्रतिमा

ETV MP/Chhattisgarh
Updated: February 17, 2017, 3:42 PM IST
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Updated: February 17, 2017, 3:42 PM IST
छत्तीसगढ़ में बस्तर जिले से महज 70 किलोमीटर दूर भोंगापाल में खुदाई के दौरान छठी शताब्दी की बुद्ध प्रतिमा मिली है. खुदाई में दूसरी बेशकीमती मूर्तियां भी मिली है.

बुद्ध की मिली मूर्ति बस्तर संभाग की इकलौती प्रतिमा है. साथ ही छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी मूर्ति भी है. बुद्ध की प्रतिमा को ग्रामीणों ने एक छोटे कमरे में रखा है, लेकिन अन्य मूर्तियां खुले आसमान में नीचे रखी हुई है.

दिलचस्प बात यह है कि भोंगापाल को संवेदनशील इलाका बताते हुए पुरातत्व विभाग इस क्षेत्र से दूरी बनाए हुए है. इन प्राचीन धरोहर को संरक्षण की जरूरत है.

दरअसल, भोंगापाल में लसूरा नदी के किनारे एक ऐसा स्थान है जहा ईंट से निर्मित चैत्यग्रह है. साल 1990-91 में हुए उत्खनन के दौरान भोंगापाल का यह चैत्यगृह सामने आया था. अब खुदाई के दौरान बुद्ध की विशालकाय प्रतिमा मिली, जिसकी स्थानीय लोग डोकराबाबा के रूप में पूजा कर रहे हैं.

पिछले 14 साल से इस इलाके की हर घटना पर पैनी रखने वाले हिमेश गांधी ने बताया कि बुद्ध प्रतिमा से कुछ ही दूरी पर मंडप में सप्तमातिृका देवी और शिवलिंग की प्रतिमा है. पुरातत्व विभाग को इसकी जानकारी है, पर विभाग ने अपना बोर्ड लगाकर इसे छोड़ दिया है.

ग्रामीण आपस में सहयोग कर यहां पड़ी मूर्तियों को बचाने में लगे हुए हैं. इस प्रतिमा को लेकर लोगो में मान्यता है कि प्रतिमा को घिसकर जिस किसी के ऊपर लगा दिया जाता है तो उससे प्रेम विवाह या किसी को भी वशीकरण कर सकते. इसी कारण प्रतिमा की लोग घिसाई कर रहे हैं, जिसकी वजह से प्रतिमा आधी से ज्यादा घिस चुकी है.

बस्तर के जिला बनने के बाद यहां अब तक छह कलेक्टर अपनी सेवाएं दे चुके हैं पर इस इलाके की किसी ने सुध नहीं ली है. प्रशासनिक उदासीनता के कारण इन मूर्तियों की उपेक्षा और उचित संरक्षण नहीं मिल पाने के चलते अब ये मूर्ति धीरे-धीरे गायब हो रही है.

बस्तर में अब तक कई शताब्दियों के अवशेष मिल चुके हैं. महीने भर पहले ही दंतेवाड़ा जिले के ढोलकाल में विशालकाय भगवान गणेश की प्रतिमा के अचानक गायब हो गई थी. यहां इस प्रतिमा के साथ ही कई दूसरी मूर्तियां जंगल में बिखरी पड़ी है, जिसे संरक्षण की जरूरत है.

कहीं ऐसा ना हो कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते ये धरोहर तस्करों की कारगुजारी गायब न हो जाए.
First published: February 17, 2017
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