हाथियों के आतंक और सरकारी अनदेखी ने छुड़वाई बेटियों की पढ़ाई

ETV MP/Chhattisgarh
Updated: May 18, 2017, 6:35 PM IST
हाथियों के आतंक और सरकारी अनदेखी ने छुड़वाई बेटियों की पढ़ाई
सहायक जिला शिक्षा अधिकारी सतीश नायर से मिलने पहुंची छात्राएं.
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Updated: May 18, 2017, 6:35 PM IST
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के लहंगर गांव में हाथियों के आतंक और सरकार की अनदेखी के चलते दो दर्जन से ज्यादा लड़कियों को स्कूल छोड़ना पड़ा है. केन्द्र व राज्य सरकार के बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ के नारे के बीच पढ़ाई के लिए बेटियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

महासमुंद जिला मुख्यालय से 27 किमी दूर बसे ग्राम लहंगर की आबादी लगभग 900 के करीब है. आदिवासी बाहुल्य इस गांव में शासकीय हाईस्कूल में पिछले साल 90 छात्र-छात्राओं ने 10वीं की परीक्षा दी थी. यह इलाका चारों तरफ से घने जंगलों से घिरा है, जहां डेढ़ वर्षों से हाथियों का आतंक है. गांव वाले पिछले तीन वर्षों से हायर सेकेंडरी स्कूल की मांग कर रहे हैं, लेकिन शिक्षा विभाग के आला अधिकारी कुम्भकर्णी नींद सो रहे हैं.

वर्तमान में ग्राम लहंगर की दो दर्जन से ज्यादा बेटियां 11वीं की पढ़ाई करना चाहती हैं, पर उन्हें पढ़ाई के लिए गांव से 15 से 20 किमी दूर गढ़सिवनी, सिरपुर, छपोराडीह एवं तुमगांव जाना पड़ेगा. ये सारे गांव जंगलों से घिरे हैं और यहां भी हाथियों का आंतक है. यही कारण है कि अभिभावक इन स्कूलों में अपनी बेटियों को नहीं पढ़ाना चाहते हैं. लिहाजा इनके पास महासमुंद में रहकर पढ़ाई करने के सिवाय और कोई चारा भी नहीं है. अभिभावक महासमुंद में बेटियों का एडमिशन कराने आए तो स्कूल प्रबंधन ने कम नंबर होने का हवाला देते हुए लड़कियों को एडमिशन देने से मना कर दिया.

इस मामले में जब सहायक जिला शिक्षा अधिकारी सतीश नायर से बात की गई तो वह शासन के सिर पर ठीकरा फोड़ते नजर आए.
First published: May 18, 2017
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