सरेंडर नक्सली ने किया बुर्कापाल हमले की साजिश का खुलासा

ETV MP/Chhattisgarh
Updated: May 18, 2017, 11:38 PM IST
सरेंडर नक्सली ने किया बुर्कापाल हमले की साजिश का खुलासा
बुर्कापाल हमले में शामिल नक्सली पोडियम पंडा.
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Updated: May 18, 2017, 11:38 PM IST
पिछले दिनों सरेंडर करने वाले नक्सली पोडियम पंडा ने छत्तीसगढ़ के बुर्कापाल और चिंतागुफा में हुए हमले को अंजाम देने के बारे में बड़ा खुलासा किया है. बुर्कापाल हमले में शामिल नक्सली पोडियम पंडा ने 7 मई को सरेंडर कर दिया था.

पुलिस और सुरक्षा बलों को पिछले 6 सालों से पोडियम की तलाश थी. नक्सलियों और नेता, मानवाधिकार आयोग, व्यापारियों के बीच की अहम कड़ी पोडियम ने कइ नामों का भी खुलासा भी किया है. इसकी निशानदेही पर ही मंगलवार को 8 नक्सलियों को पकड़ा गया था.

ऐसे किया सरेंडर
चिंतागुफा के पूर्व सरपंच पोडियम पंडा ने 7 मई को चिंतागुफा पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था. 9 मई को पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा के सामने उसे पेश किया गया. इसके बाद कागजी कार्रवाई कर उससे पूछताछ की गई. पूछताछ में अहम सुराग हाथ लगने के बाद इसकी निशानदेही पर चिंतागुफा और आस-पास के इलाकों से 8 नक्सलियों को पकड़ा गया. गुरुवार को सुकमा में पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने प्रेस कांफ्रेंस कर बाकायदा इसके सरेंडर का खुलासा किया. इस दौरान आरोपी ने मीडिया के सामने खुद सुकमा हमले की साजिश समेत कई राज खोले.

बुर्कापाल हमले की यूं रची गई थी साजिश

पोडियम ने बताया कि सुकमा हमले से पहले 15 अप्रैल को नक्सली कमांडर आयतु उससे मिला था. उसे इंसास रायफल देकर हमले के लिए तैयार रहने को कहा. इसके बाद हमले की तैयारी शुरू हो गई. बस डेट फिक्स नहीं थी. प्रॉपर हमले के लिए मौके की तलाश की जा रही थी. 24 अप्रेल को वो मौका मिल गया. मौके पर नक्सली अलग-अलग टुकड़ी में गए थे. हर टुकड़ी में एक कमांडर था. हमले के दौरान पोडियम ने दो फायर भी किए. वह शाम 4 बजे तक उस इलाके में था. इसने बताया कि जवानों की गोली से एक टुकड़ी के कमांडर अनिल की मौत हो गई और 4 लोग बुरी तरह से जख्मी हो गए थे. इसे बोला गया कि इन्हें लेकर कसालपाड़ के पास इंतागुफा चला जाए. बाद में इस इलाके में फोर्स के एक्टिव होने के बाद इसे वहां से हट जाने को कहा गया.

2 साल से करना चाह रहा था सरेंडर
पोडियम पिछले दो साल से सरेंडर करना चाह रहा था. नक्सलियों के बड़े कमांडरों को इसकी भनक लग गई. इसके बाद हमेशा इसके साथ 4-5 हथियारबंद नक्सलियों को साए की तरह लगा दिया गया. पिछले दिनों इसको वॉच करने वाले पांचों नक्सली पेकलपारा,चिंतागुफा और मिनपा के बीच पुलिस के हत्थे चढ़ गए. बस इसके बाद पोडियम को मौका मिला गया और इसने चिंतागुफा पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया.

ऐसे आया नक्सलियों के संपर्क में
पोडियम ने बताया कि वर्ष 1997 में उसे चिंतागुफा का सरपंच चुना गया. 1998 में नक्सली कमांडर मदन्ना इसके पास आया और इसे गांव में संगम कमेटी गठित करने के लिए कहा. इसके बाद से ही नक्सली हमेशा इसके संपर्क में रहे. इसने नक्सली और उनके शहरी नेटवर्क के बीच अहम भूमिका निभाई. नक्सलियों के दैनिक उपयोग की सामग्री पहुंचाने से लेकर बड़े-बड़े व्यापारियों से मिले चंदे का पैसा पहुंचाने में पोडियम की अहम भूमिका होती थी.

बड़े नेताओं का नक्सलियों से संपर्क कराने से लेकर मानवाधिकार आयोग के एक्टिविस्टों को जंगल में पहुंचाने के काम भी यही करता था. इसने नंदिनी सुंदर और बेला भाटिया को कई बार नक्सलियों से मिलवाने की बात स्वीकार की है. जंगल में नक्सलियों के बड़े ठिकाने समेत दूसरे कई खुलासे भी किए हैं. पोडियम से पूछताछ अभी जारी है.
First published: May 18, 2017
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