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कैसे रिजल्ट की करें उम्मीद, जब 25 प्रतिशत टीचर के भरोसे हों स्कूल


Updated: April 21, 2017, 9:47 AM IST
कैसे रिजल्ट की करें उम्मीद, जब 25 प्रतिशत टीचर के भरोसे हों स्कूल
प्रतीकात्मक चित्र

Updated: April 21, 2017, 9:47 AM IST
झारखंड गठन के करीब 16 साल हुए हैं. इस बीच हाईस्कूलों की संख्या तकरीबन दो गुनी हुई. पर शिक्षकों की नियुक्ति महज दो बार हुई. लिहाजा स्कलों में हाईस्कूल के शिक्षक महज 25 प्रतिशत हैं. शेष जगह रिक्त है जिससे पठनपाठन प्रभावित हो रहा है.

आंकड़ों में हालात

राज्य के हाईस्कूलों में शिक्षकों के करीब 23 हजार पद सृजित हैं. पर इनमें 17000 से अधिक पद रिक्त हैं. कई प्राथमिक-माध्यमिक विद्यालयों को हाईस्कूल में अपग्रेड किया गया, पर हाईस्कूल के टीचर देना सरकार भूल गई. आलम यह है कि करीब एक हजार अपग्रेड हाईस्कूल में एक भी स्थायी टीचर नहीं. एक अखबार में छपी खबर के मुताबिक 1300 अपग्रेड स्कूलों में महज 338 हाईस्कूलों में ही शिक्षकों की नियुक्ति हुई है. शेष अपग्रेड स्कूलों में  प्राथमिक और माध्यमिक टीचर के भरोसे बच्चे मैट्रिक की पढ़ाई भी करते हैं.

आती हैं यह दिक्कतें भी

शिक्षकों की कमी के कारण जहां पढ़ाई में दिक्कत होती है, वहीं परीक्षा के बाद कॉपियों की जांच में भी हर साल झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) समस्याओं से दो चार होता है. कॉपियां चेक करने के लिए जहां सेवा निवृत शिक्षकों की सेवा लेनी पड़ती है, वहीं नियम को ताक पर रख कर भी बहुत कुछ करना पड़ता है. कॉपियां चेक करने के लिए न्यूनतम तीन साल का पढ़ाने का अनुभव जरूरी है. पर जैक वर्ष 2015 में नियुक्त शिक्षकों से भी कॉपी जांच कराने की अनुमति सरकार से ले रहा है.
First published: April 21, 2017
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