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कभी इंदिरा आवास के लिए तरसे थे यह आईएएस, अब बने पेंशन दिलाने वाले साहब

Chetna Jha | News18.com
Updated: April 18, 2017, 3:08 PM IST
कभी इंदिरा आवास के लिए तरसे थे यह आईएएस, अब बने पेंशन दिलाने वाले साहब
आईएएस रमेश घोलप
Chetna Jha | News18.com
Updated: April 18, 2017, 3:08 PM IST
झारखंड के खूंटी के मूरहू ब्लॉक के पास के एक मोड़ पर बुजुर्गों की भीड़ जमा थी. तत्कालीन एसडीओ  रमेश घोलप की गाड़ी गुजरी तो उन्हीं बुजुर्गों ने इशारा कर गाड़ी रुकवायी. पूछने पर बताया कि हमें पता चला है यहां वृद्धा पेंशन दिलाने वाला साहब आया है, हमें भी पेंशन चाहिए. यह एक घटना है जो रमेश घोलप के दिल को सकून देती है. रमेश सरायकेला के जिला कलेक्टर और 2012 बैच के आईएएस अधिकारी हैं.

संघर्ष में तपे वे दिन
डेढ़ साल की उम्र में पोलियो ग्रस्त होने के बाद रमेश जिंदगी में संभलना सीख रहे थे. पिता की शराब की लत और टीबी की बीमारी से परिवार परेशान था. उधर सरकारी अस्पताल में ठीक से पूरा इलाज करने के बजाय बीच में ही पिता को छुट्टी दे दी जाती. सही इलाज नहीं होने के कारण 2005 में पिता चल बसे. तब रमेश 12वीं में थे. मां ने मौत के तीसरे दिन ही बेटे को परीक्षा देने भेज दिया, यह कहते हुए कि हालात बदलना है तो तुम्हें पढ़ना होगा. मां दिन भर दूसरे के खेतों में काम करती, रेहड़ी लगाती, तब जा कर चंद पैसे हाथ पर आते जिससे दोनों बेटों की परवरिश होती.

पल्स पोलियो अभियान के समय खास सर्तकता होती है रमेश घोलप की, ताकि कोई बच्चा छूटे नहीं.
पल्स पोलियो अभियान के समय खास सर्तकता होती है रमेश घोलप की, ताकि कोई बच्चा छूटे नहीं.


पेंशन के नाम पर वह साल भर का दर्द
गांव की आंगनबाड़ी सेविका साल भर से मां को विधवा पेंशन दिलाने के नाम पर पैसे ठग रही थी. रमेश कहते हैं कि उस दिन वाकई दिल रो गया था जब अंतिम किस्त कह कर आंगनबाड़ी सेविका ने मां से 300 रुपए वसूले थे.  वह उनके पांच दिन की कमाई थी जो उन्होंने दूसरे के खेतों पर काम कर कमाए थे.

कभी इंदिरा आवास था सपनों का घर

पत्नी और बच्चों के साथ सरायकेला के आईएएस रमेश घोलप.
पत्नी और बच्चों के साथ सरायकेला के आईएएस रमेश घोलप.


एक ऐसा दौर भी था जब एक रिश्तेदार के इंदिरा आवास के छोटे से घर के एक कमरे में रमेश अपनी मां और भाई के साथ रहते थे. मां मजूदरी करती थी और दोनों बेटे पढ़ते थे. तब वे चाहते थे कि बीपीएल परिवार को मिलने वाला एक इंदिरा आवास उनके परिवार को भी मिले, लेकिन लालफीताशाही की खामी देखिए कि जरूरतमंद परिवार को वह भी नहीं मिला.

पेंशन का मामला हो या इंदिरा आवास का, व्यक्तिगत तौर पर जरुरत आंकते हैं आईएएस रमेश घोलप.
पेंशन का मामला हो या इंदिरा आवास का, व्यक्तिगत तौर पर जरुरत आंकते हैं आईएएस रमेश घोलप.


आईएएस बनने के बाद यह किया
रमेश की जहां भी पोस्टिंग हुई, वहां उन्होंने इंदिरा आवास, पेंशन आदि के लिए इलाके में भ्रमण के अलावा मोबाइल वैन, जनता दरबार आदि का आयोजन किया. वह भी फॉर्म भरवाने, एकाउंट खुलवाने और फ्री फोटो खिंचावने आदि सभी चीजों की व्यवस्था के साथ ताकि तीन घंटे में पेंशन की सारी औपचारिकाताएं पूरी हो सकें. इस बार भी वे तभी आश्वस्त हुए जब सरायकेला में 100 प्रतिशत पोलियो अभियान पूरा हो गया. राशन, विधवा पेंशन, कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर आदि मामले में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों, बाबुओं और अधिकारियों के साथ सख्ती की. प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना आदि में भी व्यक्तिगत तौर पर जरूरत आंकते.
First published: April 18, 2017
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