सूबे में ढाई लाख बच्चे खा रहे मुफ्त का मिड डे मील

Ajay Lal

Updated: March 16, 2017, 5:54 PM IST
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ना स्कूल में नामांकन और ना ही किसी कक्षा के छात्र, ना रजिस्टर में नाम और ना ही कभी स्कूल में झांकने आए. बावजूद इसके ढाई लाख बच्चे मुफ्त का मिड डे मील खा रहे हैं. यह चौंकाने वाला तथ्य उस वक्त सामने आया जब शिक्षा विभाग ने जांच करवायी. राज्य में हर दिन 29 लाख बच्चों के लिए मिड डे मील बनता है लेकिन इस संख्या में ढाई लाख ऐसे बच्चे हैं जो स्कूल पढ़ने के लिए नहीं आते बल्कि मिड डे मील खाने के लिए आते हैं.

अब आगे क्या

सूबे में ढाई लाख बच्चे खा रहे मुफ्त का मिड डे मील
ना स्कूल में नामांकन और ना ही किसी कक्षा के छात्र, ना रजिस्टर में नाम और ना ही कभी स्कूल में झांकने आए. बावजूद इसके ढाई लाख बच्चे मुफ्त का मिड डे मील खा रहे हैं.

इस जांच की रिपोर्ट केन्द्र को भेजी ही जानी थी कि दिल्ली से आये एक पत्र ने शिक्षा विभाग के होश उड़ा दिए. केन्द्र से आए पत्र में कहा गया है कि जून महीने से उन्हीं बच्चों का मिड डे मील दिया जाएगा जिनके पास आधार कार्ड होगा. यानि बगैर आधार कार्ड किसी बच्चे को मिड डे मील नहीं दिया जाएगा. सबसे बड़ी बात ये कि इसके लिए सभी स्कूलों को निर्देश भी भेज दिया गया है. दरअसल  बच्चों की मिड डे मील का निवाला छीनने वाले माफिया तत्वों पर सरकार ने नकेल कस दी है. अब सरकार चावल के एक - एक दाने का हिसाब रखेगी और मिड डे मील उन्हीं बच्चों को मिलेगा जिसके पास आधार होगा. अब से पहले गैर हाजिर बच्चों को रजिस्टर पर हाजिर दिखाकर मिड डे मील का निवाला लूट लिया जाता था. लेकिन अब शायद यह सब संभव नहीं हो पाएगा.

स्कूलों को मिलेगी मशीन

मिड डे मील के निदेशक जगजीत सिंह कहते हैं कि ढाई लाख बच्चों का हर दिन मिड डे मील विभाग के लिए नासूर बन गया था. लेकिन अब शायद लगाम लग पाए. इस योजना को लागू होने में अभी दो से तीन महीने का वक्त है. तमाम स्कूलों को एक विशेष प्रकार की मशीन दी जाएगी जिसमें आधार नंबर या फिर अंगूठा दिखाते ही बच्चों की पूरी जानकारी सामने आ जाएगी. यह रिकॉर्ड राज्य सचिवालय में रैनडम तरीके से जांच की जाएगी. सूबे की शिक्षा मंत्री नीरा यादव कहती हैं कि हमारे स्कूल की प्राथमिकता बच्चों को शिक्षा देना है ना कि भोजन देना. लेकिन जब ये योजना है तो सख्ती तो करनी ही होगी.

हालांकि शिक्षकों का मानना है कि ऐसे करने से शिक्षकों के कार्य पर अतिरिक्त बोझ बढ जाएगा. शिक्षक कहते हैं योजना अच्छी है. लेकिन इसे लागू करने की पूरी जिम्मेदारी शिक्षकों की होगी जिससे शैक्षणिक कार्य पर असर पड़ेगा.

 

First published: March 16, 2017
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