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तीन तलाक लेने में पुरुषों से आगे हैं मुस्लिम महिलाएं


Updated: May 20, 2017, 8:03 AM IST
तीन तलाक लेने में पुरुषों से आगे हैं मुस्लिम महिलाएं
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Updated: May 20, 2017, 8:03 AM IST
तीन तलाक को लेकर पूरे देश में एक बहस छिड़ी हुई है. पक्ष और विपक्ष में आवाजें बुलंद हो रही हैं. लेकिन इससे जुड़ा एक सच ये भी है कि महिलाएं भी तलाक लेने में पीछे नहीं हैं. मध्यप्रदेश के भोपाल रियासत में न्यूज18 की खास पड़ताल में खुलासा हुआ है कि मुस्लिम पुरुषों से ज्यादा महिलाएं खुला के अधिकार का प्रयोग कर पति से अलग हो रही हैं.

इस्लाम में विवाह को खत्म करने के लिए पति और पत्नी दोनों को अधिकार है. पति को यह अधिकार तलाक और पत्नी को खुला के रूप में दिया गया है. इस्लाम में पूरी आजादी है कि महिला अपने शौहर से तलाक लेकर अपनी जिंदगी का फैसला कर सकती है.

मध्यप्रदेश के भोपाल रियासत की मुस्लिम महिलाएं अपने इस हक का खुलकर इस्तेमाल कर रही हैं. भोपाल रियासत के तहत तीन जिले आते हैं, जिसमें भोपाल के अलावा रायसेन और सीहोर जिले शामिल हैं. मसाजिद कमेटी के आंकड़ों के मुताबिक, रियासत में मुस्लिम महिलाओं के खुला यानी तलाक लेने के मामले पुरुषों के मुकाबले करीब 20 फीसदी ज्यादा हैं.

मसाजिद कमेटी के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक,

-वर्ष 2016 में खुला के 459 मामले सामने आए थे.
-इसी साल 386 पुरुषों ने तलाक लिए आवेदन दिया था.
-वर्ष 2017 के पहले तीन महीनों में भी महिलाएं तलाक मांगने में आगे रही.
-एक जनवरी 2017 से 31 मार्च 2017 तक 131 महिलाओं ने खुला के हक का प्रयोग किया.
-इस दरमियान पुरुषों के तलाक चाहने वालों संख्या 80 रही.
-वहीं, 18 मामलों में मसाजिद कमेटी ने पति और पत्नी में राजीनामा करा दिया, जिसके बाद वह साथ में रहने के लिए राजी हो गए.

मसाजिद कमेटी के अधीक्षक यासिर अराफात बताते हैं, 'महिलाओं के तलाक लेने की पीछे की ठोस वजह के बारे में तो नहीं बताया जा सकता, लेकिन आधुनिक जीवन शैली से जरूर रिश्तों में खटास आ रही है, जो पति-पत्नी के बीच रिश्तों में टूट की वजह बनता जा रहा है' हालांकि, इस दरमियान तीन तलाक का एक भी मसला मसाजिक कमेटी के पास नहीं पहुंचा.

​उर्दू के मशहूर शायर महताब आलम का कहना है कि महिलाओं के 'खुला' लेने को इस नजरिए से भी देखा जा सकता है कि वो अपने अधिकारों के लिए जागरूक हो रही है.

(डिस्क्लेमर: जिस तीन तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट से लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी है, उन मामलों की पुष्ट संख्या न होने के कारण उसे इस खबर में शामिल नहीं किया गया है.)
First published: May 20, 2017
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