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राजसत्ता की देवी के मंदिर आए थे रामनाथ कोविंद, 10 दिन बाद बने राष्ट्रपति उम्मीदवार


Updated: June 19, 2017, 5:16 PM IST
राजसत्ता की देवी के मंदिर आए थे रामनाथ कोविंद, 10 दिन बाद बने राष्ट्रपति उम्मीदवार
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Updated: June 19, 2017, 5:16 PM IST
भाजपा ने एक बार फिर चौंकाते हुए बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया है.

अचानक सुर्खियों में छाए रामनाथ कोविंद का मध्यप्रदेश से भी गहरा नाता रहा है. उनका परिवार राज्य के गुना जिले में रहता है. रामनाथ कोविंद 10 दिन पहले मध्यप्रदेश के दतिया जिले में पहुंचे थे. यहां उन्होंने पत्नी सविता कोविंद के साथ पीतांबरा मंदिर पहुंचकर मां बगलामुखी की पूजा अर्चना की थी.

अधिष्ठात्री देवी के साथ ही मां बगलामुखी को राजसत्ता प्राप्ति की मां भी माना जाता है. मान्यता है कि देवी के दर पर आने वाले हर भक्त की मुराद पूरी होती है और उसे राजसत्ता का सुख जरूर मिलता है.

कारगिल युद्ध के दौरान वाजपेयी के कहने पर हुआ था विशेष यज्ञ

भारत-पाकिस्तान के बीच 1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान पूरे देश में लोग ऑपरेशन विजय के सफल होने की कामना कर रहे थे. इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री होने के नाते अटल बिहारी वाजपेयी पर भी काफी दबाव था.

बताया जाता है कि इस युद्ध में भारतीय सेना को विजय मिले इसके लिए वाजपेयी ने दतिया में पीताम्बरा पीठ की मां बगलामुखी के मंदिर में विशेष यज्ञ करवाया था.

दरअसल, दतिया की मां बगलामुखी को शत्रु नाश की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है. जब-जब देश पर युद्ध की विपत्ति आई तब-तब यहां पर विशेष यज्ञ करवाया गया. फिर चाहे वो 1962 में चीन का आक्रमण हो, या फिर 1965 और 1971 में भारत पर पाकिस्तान का हमला या फिर कारगिल युद्ध, इन सभी युद्धों के दौरान मां बगलामुखी के मंदिर में विजय प्राप्ति के लिए यज्ञ करवाया गया.

कारगिल युद्ध के दौरान देश के कुछ विशिष्ट साधकों ने कई दिनों तक साधनाएं और यज्ञ किए जिससे दुश्मनों को एक बार फिर मुंह की खानी पड़ी और जुलाई 1999 में भारतीय सेना ने पूरी तरह से पाकिस्तानी सेना को एलओसी के दूसरी ओर खदेड़ दिया.

इसी तरह 1962 में चीन के आक्रमण के समय भी यहां पर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के अनुरोध पर 51 कुंडीय महायज्ञ कराया गया था.

नेताओं की गहरी आस्था

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, राजमाता विजयाराजे के अलावा मध्य प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और दो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और उमा भारती की इस मंदिर से खासी आस्था जुड़ी हुई है. राजनेताओं का मानना है कि मां बगलवामुखी के दर पर आने वाले हर भक्त की मुराद पूरी होती है और उसे राजसत्ता का सुख जरूर मिलता है.
First published: June 19, 2017
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