यहां शेरों को शिकार करना सिखा रहे हैं इंसान

ETV MP/Chhattisgarh
Updated: January 31, 2017, 4:54 PM IST
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जिस शेर के सामने आ जाने से अच्छे-अच्छों की घिघ्घी बंध जाती है, उन्हें इंसान शिकार करने की ट्रेनिंग दे रहे हैं. जी हां, मध्यप्रदेश के संजय गांधी टाइगर रिजर्व में अनाथ हुए तीन शावकों को बांधवगढ़ में कृतिम तौर पर वाइल्ड बनाने की कोशिश जारी है. शुरुआती दौर में तीनों को एक कमरे में जंगल का माहौल बनाकर उसमें रखा गया है. बाद में बाड़े में रखकर उन्हें बाघ के हिंसक स्वभाव की ट्रेनिंग दी जाएगी. डेढ़ से दो महीने के दुधमुंहे शावकों को वाइल्ड बनाना अपने आप में चुनौतीपूर्ण और संभवत: दुनिया का पहला प्रयास है.

पिंजरे में कैद बाघ के ये वही दुधमुंहे शावक हैं, जिन्हें अपनी मां के साए में रहकर जंगल का राजा बनना था लेकिन किस्मत ने इनके सिर से मां का साया छीन लिया. यही वजह है कि दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव को पिंजरे में कैद करके वो सब सिखाने की कोशिश की जा रही है जो उनका प्राकृतिक स्वभाव है.

संजय गांघी नेशनल पार्क में जन्मे इन तीनों शावकों की मां बीते दिनों शिकारियों के करंट वाले जाल में फंसकर मौत का शिकार हो गई थी. उसके बाद बांधवगढ़ प्रबंधन ने इनके पालन और इन्हें पूर्ण बाघ बनाने का जिम्मा लेकर कृतिम तौर पर दुधमुंहे शावकों को हिंसक और खतरनाक बनाने का काम शुरू किया है.

वन्य जीव चिकित्सक, नितिन गुप्ता का मानना है कि हांलाकि यह काम इतना सरल और साधारण नहीं है. इसके बावजूद इसके तीनों शावकों की प्रगति प्रबंधन की अब तक की मेहनत की सफलता की ओर इशारा कर रहा है. उन्होंने कहा कि यह अलग बात है कि प्रबंधन बाघों की प्रकृति से परचित है और सब कुछ ऊपर वाले पर भरोसा कर पूरी लगन से अपनी जिम्मेदारी को निभाने के प्रयास में जुटा हुा है.

फील्ड डायरेक्टर, मृदुल पाठक का कहना है कि बहरहाल बांधवगढ़ प्रबंधन शावकों को कृतिम तौर पर एक कमरे में जंगली माहौल बनाकर इस चुनौती भरे काम को अंजाम देने में लगा है, जिसे शायद इसके पहले इतनी कम उम्र के शावकों में नहीं किया गया है. अब देखना है कि जंगल में पैदा होकर राजा बनने की हैसियत रखने वाले बाघ शावकों को पार्क प्रबंधन कृतिम सरंक्षण देकर असली राजा बना पाता है या नहीं.
First published: January 31, 2017
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