मरते तारे दे सकते हैं पृथ्वी के बाहर जीवन का सुराग

आईएएनएस

Updated: February 26, 2013, 5:42 PM IST
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वाशिंगटन। अंतरिक्ष में जीवन की आखिरी सांसें गिन रहे कुछ तारे अपने आसपास जीवन से भरे किसी ग्रह का सुराग दे सकते हैं। यह कहना है हार्वर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के सिद्धांतकार अवी लोयब का। उन्होंने कहा कि पृथ्वी के बाहर जीवन तलाश करने के लिए जिस तरह पहले तारों का अध्ययन करने की जरूरत है, वह है सफेद बौना अथवा श्वेत वामन तारे।

जब सूर्य के आकार का कोई तारा मरता है तो उसकी बाह्य परत में भारी उभार आ जाता है। उभार के बाद जो तप्त क्रोड़ बच जाता है उसे ही सफेद बौना कहते हैं।

मरते तारे दे सकते हैं पृथ्वी के बाहर जीवन का सुराग
अंतरिक्ष में जीवन की आखिरी सांसें गिन रहे कुछ तारे अपने आसपास जीवन से भरे किसी ग्रह का सुराग दे सकते हैं।

लोयब और उनके सहयोगी डान माओज (तेल अवीव यूनिवर्सिटी) अनुमान करते हैं कि सबसे नजदीकी 500 सफेद बौनों का सर्वेक्षण करने पर हम पृथ्वी जैसे रहने लायक एक या अधिक ग्रहों का पता लगा सकते हैं।

हार्वर्ड-स्मिथसोनियन के एक वक्तव्य में कहा गया है कि यह उत्साहजनक नतीजे एक नए सैद्धांतिक अध्ययन से आया है। इसमें माना गया है कि श्वेत वामन तारों की परिक्रमा पृथ्वी जैसे ग्रह कर रहे हैं।

श्वेत वामन तारों के ग्रहों के पर्यावरण में आक्सीजन का पता आसानी से लगाया जा सकता है। यह सूर्य जैसे किसी तारे की परिक्रमा कर रहे पृथ्वी जैसे किसी ग्रह के पर्यावरण में मौजूद आक्सीजन का पता लगाने से कहीं ज्यादा आसान है।

एक सामान्य सफेद बौना पृथ्वी का आकार का होता है। इसे ठंडा और धुंधला होने में काफी वक्त लगता है। लेकिन इसके पास इतनी उष्मा हो सकती है कि वह अपने आस-पास के संसार को अरबों वर्ष तक गर्मी दे सके।

चूंकि सफेद बौना सूर्य से छोटा और मंद है इसलिए ग्रहों को इसके करीब होना चाहिए। ग्रहों के रहने योग्य होने के अलावा इसके सतह पर पानी भी होना चाहिए।

यह ग्रह करीब दस लाख मील की दूरी से सफेद बौने का प्रत्येक दस घंटे में एक चक्कर लगाता है।

First published: February 26, 2013
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