गोवर्धन पूजा पर गोबर के ढेर में लिटाए जाते हैं बच्चे, अनोखी है वजह!

News18India.com
Updated: November 1, 2016, 11:44 AM IST
गोवर्धन पूजा पर गोबर के ढेर में लिटाए जाते हैं बच्चे, अनोखी है वजह!
कुछ परंपराएं समय के साथ जानलेवा बनती जा रही हैं जैसे गोवर्धन पूजा पर बैतूल में बच्चों को गोबर में लिटाने की एक अजीबोगरीब परंपरा है...
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Updated: November 1, 2016, 11:44 AM IST
बैतूल। कुछ परंपराएं समय के साथ जानलेवा बनती जा रही हैं जैसे गोवर्धन पूजा पर बैतूल में बच्चों को गोबर में लिटाने की एक अजीबोगरीब परंपरा है। हर साल दिवाली के दूसरे दिन सारे ग्वाले मिलकर एक गोबर से एक गोवर्धन पर्वत बनाते हैं, जिसे फूलों से सजाया जाता है और फिर पूजा पाठ के दौरान ही बच्चों को गोबर के इस ढेर में लिटाया जाता है।

ग्वालों की सदियों से ऐसी मान्यता है कि गोबर में लिटाने से उनके बच्चे निरोगी रहते हैं, लेकिन इस परंपरा को लेकर डॉक्टरों की राय अलग है। डॉक्टरों का मानना है कि गोबर में सक्रबटायफस जैसे खतरनाक बैक्टीरिया होते हैं जिससे फैला इन्फेक्शन जानलेवा भी साबित हो सकता है। इन तत्थों के बावजूद बैतूल में जिला मलेरिया कार्यालय के परिसर में ये आयोजन हुआ।

बैतूल शहर के बीचोंबीच जिला मलेरिया हॉस्पिटल के परिसर में गोवर्धन पूजा हुई जहां ग्वालों द्वारा गोबर से बनाए गए गोवर्धन पर्वत में छोटे छोटे बच्चों को लिटाया भी गया। ग्वाल समुदाय की मान्यता है कि बच्चों को हर साल गोवर्धन पूजा के दौरान गोबर में लिटाने की परंपरा सदियों पुरानी है और अपने बच्चों को निरोगी रखने के लिये वो इस परंपरा को निभा रहे हैं।

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कैलाश यादव ने बताया कि ऐसा नहीं है कि इस समुदाय में लोग अशिक्षित हैं। इनमें से कई लोग पढ़े लिखे और नौरीपेशा हैं लेकिन फिर भी ये परंपरा के सामने अंधविश्वास को तरजीह देते हैं। इनके मुताबिक गोबर में लिटाने से कभी भी किसी बच्चे को नुकसान नहीं हुआ और जो डॉक्टर कहते हैं वैसा कुछ देखने में नहीं आया।

स्थानीय निवासी मनोज रसिया ने कहा कि पहले की बात और होगी लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक इन दिनों गोबर और घास में पलने वाले सक्रबटायफस जैसे बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं जो बच्चों के लिये तो जानलेवा भी हो सकता है इसलिये परंपराएं अपनी जगह रहे लेकिन जानबूझकर बच्चों को बीमारियों के हवाले करने के तौर तरीके बदलने की जरूरत है।

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डॉ.राजेंद्र देशमुख शिशु रोग विशेषज्ञ, बैतूल ने बताया कि परंपराओं के नाम पर अंधविश्वास के और भी कई मामले हैं जिनमें से ये भी एक है। तमाम दावों के बावजूद प्रशासन आज भी ऐसी अन्धविश्वास परंपराओं पर अंकुश नहीं लगा पाया है जिससे आने वाली पीढ़ी भी शिक्षित होने के बावजूद इन परंपराओं से अछूती नहीं रह सकेगी।
First published: November 1, 2016
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