OMG! बीवी की याद में बनवा दिया ताजमहल

News18Hindi
Updated: July 6, 2017, 5:20 PM IST
OMG! बीवी की याद में बनवा दिया ताजमहल
बुलंदशहर के रिटायर्ड क्लर्क फैजल हसन कादरी ने साल 2012 में अपनी दिवंगत पत्नी तज्जमुली बेगम की याद में ताजमहल की अनुकृति बनवाई.
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Updated: July 6, 2017, 5:20 PM IST
“एक शहंशाह ने बनावा के हंसी ताजमहल, सारी दुनिया को मोहब्बत की निशानी दी है.” इन लाइनों को शकील बदायूनी ने लिखा है.  बदायूनी की कलम से निकले ये अल्फाज ताजमहल की कहानी कहते हैं.

मुहब्बत की निशानी ताजमहल को मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल के लिए सन् 1631 में बनवाया था.

इसके ठीक 381 साल बाद बुलंदशहर के एक रिटायर्ड क्लर्क फैजल हसन कादरी ने साल 2012 में अपनी दिवंगत पत्नी तज्जमुली बेगम की याद में ताजमहल की अनुकृति बनवाई.

78 साल के फैजल साहब ने पत्नी के मकबरे पर एक मिनी ताजमहल का निर्माण करवाया और वो भी अपने बलबूते पर. फैजल साहब का यह ताजमहल हूबहू आगरा के ताजमहल की नकल तो है, लेकिन इसमें संगमरमर पत्थर और नक्काशी का कोई काम नहीं है.

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केवल 15 लाख रुपये की लागत से तैयार हुआ फैजल हसन कादरी का ताजमहल उनके तज्जमुली बेगम के प्यार की अमर निशानी है.

फैजल कादरी की कोई संतान नहीं है. उनकी मरहूम बेगम तज्जमुली ने फैजल से कहा कि अगर दोनों मर जाएंगे तो कोई उनका नामलेवा नहीं होगा. इस बात पर फैजल साहब ने कहा कि वो ताजमहल बनवाकर अपनी पत्नी का नाम इतिहास को पन्नों में दर्ज कर देंगे.

दिसंबर 2011 में तज्जमुली की गले के कैंसर से मौत हो गई. जिसके बाद फैजल साहब ने तज्जमुली से किये वादे को निभाते हुए फरवरी 2012 में मिनी ताजमहल का काम शुरू करवा दिया.

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इसके लिए वो पहले कारीगरों को ताजमहल घुमा कर लाये ताकि वो उस डिजाइन को अच्छी तरह समझ सकें. फैजल हसन कादरी ने बचत और प्रोविडेंट फंड के पैसे इकट्ठा किये और बाकी रकम के इंतजाम के लिए अपनी जमीन बेची. कुल मिलाकर 15 लाख रुपये जमा हुए, जिनसे 18 महीनो में एक ढाचा खड़ा हो गया.

पैसे खत्म होने के कारण उन्हें ताजमहल का काम बंद करना पड़ा. लोगों ने उन्हें मदद की पेशकश की, मगर उन्होंने यह कह कर ठुकरा दी की इस ताजमहल को वो अपने पैसे से पूरा करवाएंगे. अब जैसे-जैसे उनके पास अपनी पेंशन के रुपये जमा होते हैं, वो इसका काम करवाते रहते हैं.
First published: July 6, 2017
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