अंतरिक्ष में एक अनजान जगह से बार-बार आते हैं पृथ्वी पर रहस्मयी सिग्नल, क्या ये एलियंस के संकेत हैं !

News18India
Updated: January 8, 2017, 11:27 PM IST
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Updated: January 8, 2017, 11:27 PM IST
नई दिल्ली। पृथ्वी से दूर अंतरिक्ष में होने वाली हर तरह की गतिवधियां अपने आप में कई जानकारी के साथ तमाम राज भी छिपाए होती हैं। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को बार-बार सौरमंडल में दिखने वाली ऐसी ही एक रोशनी ने परेशान किया हुआ था। हालांकि कई देशों में चली गहरी खोजबीन के बाद वैज्ञानिकों ने इसके उत्पन्न होने का स्थान ढूंढ निकाला।

दरअसल, पिछले 10 सालों से आसमान में उगती एक तेज रोशनी ने खगोलशास्त्रियों की नींद उड़ा रखी थी। अचानक ही आंखें चौंधिया देने वाली एक रोशनी आसमान में छाती और पल भर में ही ओझल हो जाती। फिर साल 2007 में वैज्ञानिकों ने पाया कि इस रोशनी में किसी के पुकारने की आवाज थी। जैसे कोई एनकोडेड मैसेज के जरिए धरती वालों को आवाज लगा रहा हो।

हालांकि इस रहस्य को वैज्ञानिकों ने खोज निकाला। एक टेलीस्कोप में कैद हुई पुरानी फाइल्स से पता चला कि ये रोशनी थी एसआरबी यानी फास्ट रेडियो बर्स्ट। ये एक तरह की रेडियो लाइट होती है। एफ आर बी एक खगोलभौतिकी घटना है। ये एक ऐसा रेडियो सिग्नल है जो कुछ मिलीसेकेंड का होता है। इंसान अपनी आंखों से इस रोशनी को नहीं देख पाएगा, लेकिन अंतरिक्ष पर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिकों के रेडियो टेलीस्कोप में ये रोशनी दिख गई।

सालों तक एफ आर बी वैज्ञानिकों के लिए एक अबूझ पहेली थे। फिर 2 नवंबर 2012 को प्यूर्टो रिको ऑब्जर्वेट्री में देखे गए इन सिग्नलों ने वैज्ञानिकों को अचरज में डाल दिया। इस रहस्य पर जांच कर रहे सर्च फॉर एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस यानी सेटी ने पृथ्वी से 94 प्रकाश वर्ष दूर एक सितारे पर अपने उपकरण तान दिए। एक रूसी टेलीस्कोप ने इस सितारे से एक जोरदार सिग्नल कैद किए थे। ये सितारा हमारी पृथ्वी से इतनी दूर है कि जो सिग्नल हमें अब मिल रहे हैं वो भी साल 1922 में यानी अब से 94 साल पहले के होंगे।

वैज्ञानिकों के मुताबिक जब भी हमारे सौरमंडल में कोई इतना जोरदार सिग्नल आता है तो ब्रह्मांड में दूसरी सभ्यताओं के वजूद की बात को बल मिलने लगता है। हालांकि वैज्ञानिक इसके पीछे एलियन्स की थ्योरी को सीधे तौर पर नकार रहे हैं। उनके मुताबिक शायद ये सिग्नल सितारों में से ऊर्जा के अचानक विस्फोट से हुआ हो। इन सभी घटनाओं के बाद सेन फ्रांसिस्को की मेटी यानी मैसेजिंग एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस ने साल 2018 से अंतरिक्ष में 'हेलो' सिग्नल्स भेजने का फैसला किया है। इससे ये होगा कि अगर पृथ्वी के बाहर कोई जिंदगी है तो वो हमें सुन सके, हमारी लोकेशन जान पाए और हमसे आकर मिल सके।
First published: January 8, 2017
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