पुरानी टीम के साथ ही बीजेपी के नये अध्यक्ष करेंगे कार्यसमिति की बैठक, ये है कारण

SWAPNIL SONAL | ETV Bihar/Jharkhand

First published: January 13, 2017, 2:30 PM IST | Updated: January 13, 2017, 2:30 PM IST
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पुरानी टीम के साथ ही बीजेपी के नये अध्यक्ष करेंगे कार्यसमिति की बैठक, ये है कारण
file photo

नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने के बाद बिहार भाजपा की कार्यसमिति की बैठक 21 और 22 जनवरी को सिवान में होनी है.

बैठक में प्रदेश के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहेगें लेकिन सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक कार्यसमिति में प्रदेश अध्यक्ष पुरानी टीम के साथ ही बैठेंगे. ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि कार्यसमिति में पुरानी टीम ही शामिल होती है तो नयी टीम के गठन के बाद उन निर्णयों का क्या होगा जो पुरानी टीम 21 और 22 जनवरी को लेगी.

भाजपा के संविधान के मुताबिक नये प्रदेश अध्यक्ष के चयन के बाद जो नयी टीम का गठन होता है उसमें कम से कम 25 प्रतिशत लोगों की जिम्मेदारी बदलना या फिर 25 प्रतिशत नये लोगों को शामिल करना अनिर्वाय होता है. नित्यानंद राय के प्रदेश अध्यक्ष के बने तकरीबन सवा महीने बीत चुके हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी बिहार के दौरे से लौट चुके हैं, प्रदेश कार्यालय में नेताओं से बातचीत कर चुके हैं बावजूद इसके नयी टीम का गठन तो दूर प्रदेश कार्यसमीति की बैठक भी पुरानी टीम के भरोसे ही करवाया जा रहा है.

पार्टी के वरिष्ठ नेता नंद किशोर यादव की राय में टीम बदले या नहीं इससे बहुत फर्क नहीं पड़ेगा. दरअसल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने टीम के गठन की देरी की जो वहज पार्टी के शीर्ष नेताओं दी है वो है वो उत्तर प्रदेश चुनाव में लोगों का वयस्त होना है.

यदि पार्टी के कार्यकारणी की बैठक बिना किसी परिवर्तन के संपन्न होती है तो प्रदेश अध्यक्ष के सामने पुरानी टीम के निर्णयों को नयी टीम से लागू करवा पाना सबसे बड़ी चुनौती होगी. दो से ढ़ाई साल बाद पार्टी को लोकसभा चुनावों में जाना है. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता विनोद नारायण झा के मुताबिक भाजपा के कार्यकर्ताओं को इस बात की बिल्कुल परावाह नहीं है कि कौन टीम में है और कौन नहीं.

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