अगर घर खरीदने की सोच रहे हैं तो जरूर ध्‍यान रखें एक्‍सपर्ट की ये 10 बातें

News18Hindi
Updated: July 17, 2017, 7:15 PM IST
अगर घर खरीदने की सोच रहे हैं तो जरूर ध्‍यान रखें एक्‍सपर्ट की ये 10 बातें
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर
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Updated: July 17, 2017, 7:15 PM IST
अपना आशियाना हर आदमी का सपना होता है, लेकिन इसकी राह में कई मुश्किलें भी होती हैं. प्रॉपर्टी खरीदने के क्रम में अगर कुछ चीजों का ख्‍याल नहीं रखा जाए तो आपका सपना या तो अधूरा रह जाता है या फिर टूट जाता है. इस क्रम में रियल एस्‍टेट एक्‍सपर्ट वंदना रमणानी आपके लिए 10 सलाह लेकर आई हैं, जिन्‍हें फॉलो कर आप उन मुश्किलों से बच सकते हैं.

  1. सबसे पहले यह तय कर लें कि आपको रेडी टू मूव फ्लैट चाहिए या फिर अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन. अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन प्रोजेक्‍ट जीएसटी के तहत आते हैं और उस पर आपको कुछ टैक्‍स देना होगा. हालांकि दोनों के अपने नफा और नुकसान हैं. रेडू टू मूव जहां कुछ महंगे होते हैं, वहीं अंडर कंस्‍ट्रकशन थोड़ा सस्‍ता. हालांकि यह निर्णय आपकी जरूरत और संसाधन की उपलब्‍धता पर निर्भर करता है.

  2. जीएसटी के तहत सभी डेवलपर्स के लिए अपने प्रोजेक्‍ट को रेगुलेटरी अथॉरिटी में रजिस्‍टर कराना जरूरी हो गया है. इसलिए अगर आप किसी प्रोजेक्‍ट में घर खरीदने की सोच रहे हैं तो देख लें कि डेवलपर ने वह प्रोजेक्‍ट रजिस्‍टर कराया है या नहीं, या फिर रेरा रजिस्‍ट्रेशन के लिए आवेदन कर रखा है या नहीं.


  3. कारपेट एरिया, बिल्‍ट अप एरिया और सुपर बिल्‍ट अप एरिया के अंतर को जरूर समझ लें. अधिकांश लोग सुपर बिल्‍ट अप एरिया को ही कारपेट एरिया समझ लेते हैं, जिससे उन्‍हें बड़ा झटका लगता है.

  4. बिल्‍डर कब आपको डिलिवरी देने जा रहा है, उसके शेड्यूल को जरूर समझ लें. देर होने पर अथॉरिटी से उसकी शिकायत करें.

  5. कंस्‍ट्रक्‍शन से जुड़े अपडेट पर नजर रखें और उसके हिसाब से अपनी रणनीति बनाएं.

  6. यह जरूर जान लें कि उस प्रॉपर्टी को बैंक फाइनेंसिंग उपलब्‍ध है या नहीं. आपके प्रोजेक्‍ट को कौन से बैंक लोन दे रहे हैं, इसकी जानकारी भी जरूर होनी चाहिए. फिर उन बैंकों की ब्‍याज दरें जान लें. इससे आपको यह तय करने में मदद मिलेगी कि किस बैंक से आपको लोन लेना चाहिए.

  7. अगर आप रीसेल में प्रॉपर्टी ले रहे हैं तो देख लें कि उससे जुड़े प्रॉपर्टी टैक्‍स, बिजली बिल समेत अन्‍य बिल चुकाए गए हैं या नहीं.

  8. प्रॉपर्टी खरीदते समय लैंड यूज जरूर जान लें. उदाहरण के लिए यह देख लें कि वह रेजिडेंशियल है या फिर कमर्शियल, इंडस्ट्रियल या पब्लिक यूज वाला, क्‍योंकि सभी के नियम अलग-अलग हैं.

  9. प्रॉपर्टी लेते समय देख लें कि उससे जुड़े कौन-कौन से चार्जेज आपको देने होंगे. उदाहरण के लिए, रजिस्‍ट्रेशन, डेवलपमेंट चार्ज, प्रेफरेंशियल लोकेशन चार्ज आदि.

  10. प्रॉपर्टी के लोकेशन की काफी अहमियत है. वह कहां है, उस एरिया का किस तरह विकास हो रहा है, वहां जा रही है या नहीं, पास में मार्केट है या नहीं, मुख्‍य शहर से उसकी क्‍या दूरी है, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलपमेंट का क्‍या स्‍टेटस है, ये चीजें काफी अहम हैं.

First published: July 17, 2017
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