1 जुलाई से रेस्तरां और मोबाइल का बिल आएगा ज्‍यादा, जानें GST से क्‍या-क्‍या होगा महंगा

News18Hindi
Updated: May 20, 2017, 10:10 AM IST
1 जुलाई से रेस्तरां और मोबाइल का बिल आएगा ज्‍यादा, जानें GST से क्‍या-क्‍या होगा महंगा
वित्‍त मंत्री अरुण जे​टली ने जीएसटी काउंसिल की शुक्रवार को हुई बैठक के बाद कई अहम घोषणाएं कीं.
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Updated: May 20, 2017, 10:10 AM IST
वित्‍त मंत्री अरुण जे​टली ने जीएसटी काउंसिल की शुक्रवार को हुई बैठक के बाद कई अहम घोषणाएं कीं. एक जुलाई से जहां इकोनॉमी क्लास में हवाई सफर सस्ता होगा वहीं रेस्तरां में जाकर खाना महंगा होगा. इसके अलावा एप बेस्ड टैक्सी या कैब से सफर आपको पहले की अपेक्षा सस्ता पड़ सकता है.

जीएसटी में इकनॉमी क्लास में विमान यात्रा सस्ती होगी
एक जुलाई से जीएसटी के लागू होने के बाद इकोनॉमी क्लास में विमान यात्रा सस्ती हो जाएगी. इकनॉमी श्रेणी के किराये के लिए जीएसटी दर पांच प्रतिशत तय की गई है. अभी यह छह प्रतिशत है. हालांकि, बिजनेस श्रेणी में विमान से यात्रा महंगी होगी. इसके लिए कर की दर 12 प्रतिशत तय की गई है, जो अभी तक 9 प्रतिशत थी.

जीएसटी प्रणाली में ओला, उबर सस्ती होंगी

जीएसटी के तहत उबर और ओला जैसी एप आधारित टैक्सी सेवा देने वाली कंपनियों से टैक्सी की बुकिंग करना सस्ता हो जाएगा. एक जुलाई से लागू होने वाली इस नयी कर व्यवस्था के तहत इस तरह की सेवाएं पांच प्रतिशत दर की श्रेणी में आएंगी. अभी एप आधारित टैक्सी सेवाओं से टैक्सी बुक करने पर छह प्रतिशत का कर लगाता है.

रेस्तरां में खाना भी होगा महंगा
एक जुलाई से रेस्तरां में खाना महंगा हो जाएगा. आपके खाने के बिल के 40% हिस्से पर 15% टैक्स लगता है जबकि पूरे बिल पर लगभग 6% टैक्स लगता है. अभी वैट पूरे बिल पर 5% लगता है. दोनों को जोड़कर खाने पर कुल टैक्स 11% लगता है. जीएसटी में इसे तीन हिस्सों में बांटा गया है. यानी नॉन-एसी रेस्तरां में फूड बिल पर 12% टैक्स यानी 1% ज्यादा लगेगा. इसी तरह शराब लाइसेंस और एसी वाले रेस्तरां में खाने पर 18% टैक्स यानी 7% ज्यादा लगेगा. इसके अलावा लग्जरी रेस्तरां में 28% टैक्स रेट लागू होगा यानी 17% महंगा पड़ेगा.

महंगी हो जाएंगी बीमा पॉलिसियां
बीमा कवर लेना आगामी एक जुलाई महंगा हो जाएगा. जीएसटी परिषद ने इसे वित्तीय सेवा क्षेत्र के साथ मिलाने का फैसला किया है और इस पर 18 प्रतिशत की दर से कर लगेगा. फिलहाल बीमा क्षेत्र पर सेवा कर उपकर के साथ 15 प्रतिशत है. आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के मुख्य वित्त अधिकारी गोपाल बालाचंद्रन ने कहा कि बीमा के लिए जीएसटी की दर 18 प्रतिशत रखी गई है. इसे ग्राहकों पर कर का बोझ 15 से बढ़कर 18 प्रतिशत हो जाएगा.

मोबाइल बिल ज्यादा आएगा
दूरसंचार सेवाएं जीएसटी के अंतर्गत महंगी होंगी. सरकार ने इसे 18 प्रतिशत कर के दायरे में रखा है. कर्ज में डूबी दूरसंचार कंपनियों ने जीएसटी दर को लेकर नाखुशी जतायी और कहा कि दूरसंचार सेवा ग्राहकों के लिये महंगी होंगी और डिजिटल इंडिया तथा डिजिटल भुगतान जैसी सरकार की परियोजनाएं प्रभावित होंगी. फिलहाल दूरसंचार उपभोक्ताओं से उनके फोन बिल 15 प्रतिशत कर और उपकर लगता है.

छह महीने का वक्त लगेगा कारोबार को
घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने आज कहा कि वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू होने के बाद उद्योगों में स्थिरता में छह महीने का वक्त लगेगा लेकिन इस नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था सुधार के लाभ तीन साल के बाद सामने आएंगे. क्रिसिल की शोध इकाई ने कहा, ‘नयी कर व्यवस्था के तहत औद्योगिक स्थिरता में दो तिमाही का वक्त लगेगा। हालांकि जीएसटी के व्यापार, कंपनी की रणनीतियों को होने वाले लाभ एक से तीन साल की मध्यावधि में ही दिखेंगे.’

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First published: May 20, 2017
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