मार्च-अप्रैल नहीं, अब जनवरी-दिसंबर हो सकता है फाइनेंशियल ईयर

भाषा

Updated: March 18, 2017, 1:17 PM IST
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देश में फाइनेंशियल ईयर मार्च-अप्रैल की बजाय जनवरी-दिसंबर हो सकता है. पार्लियामेंट की एक कमेटी ने देश का फाइनेंशियल ईयर बदलने की सलाह दी है. कमेटी का मानना है कि अप्रैल से मार्च का फाइनेंशियल ईयर अंग्रेजों ने शुरू किया था और इस दशकों पुरानी परंपरा को समाप्त  किया जाना चाहिए.

रिपोर्ट में है प्रपोजल

मार्च-अप्रैल नहीं, अब जनवरी-दिसंबर हो सकता है फाइनेंशियल ईयर
Image Source: PTI

कमेटी की ओर से इस तरह की सलाह इस साल बजट मार्च की बजाय फरवरी में पेश करने वाली फाइनेंशियल कमेटी की एक रिपोर्ट में दी गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कमेटी यह सुझाव देगी कि फाइनेंशियल ईयर को भी उसी हिसाब से बदलकर कैलेंडर वर्ष कर दिया जाए. रिपोर्ट मुताबिक ‘‘समिति उम्मीद करती है कि सरकार अगले साल से अच्छी तैयारी करेगी.

कांग्रेस ने की है आलोचना

फाइनेंशियल ईयर बदलने के संकेतों के बीच कांग्रेस ने बजट डेट खिसकाने पर पहले ही सरकार की अलोचना भी की थी. सांसद एम वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली फाइनेंस मिनिस्‍ट्री से जुड़ी पार्लियामेंट्री कमेटी ने बजट जल्दबाजी में पेश करने पर सरकार की आलोचना की थी. कांग्रेस ने कहा था कि सरकार को बजट एक महीना पहले पेश किए जाने से पहले अच्छी तैयारी और पर्याप्त जमीनी कार्य किए जाने चाहिए थे.

बता दें कि सरकार ने बजट से जुड़े काम 31 मार्च तक पूरा करने के लिए उसे एक महीना पहले पेश करने का फैसला किया ताकि संबंधित मंत्रालय वित्त वर्ष शुरू होने के साथ ही आबंटित धन खर्च करना शुरू कर सके.

अंग्रेजों ने बनाया था फाइनेंशियल ईयर

फाइनेंशियल ईयर की मौजूदा व्यवस्था भारत सरकार ने 1867 में अपनाई थी. इसका मुख्य उद्देश्य भारत के फाइनेंशियल ईयर को ब्रिटेन सरकार के फाइनेंशियल ईयर के साथ मिलाना था. 1867 से पहले भारत में फाइनेंशियल ईयर एक मई से शुरू होता था और अगले साल 30 अप्रैल को खत्म होता था.

First published: March 18, 2017
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