सरकार का कड़वा डोज, फार्मा कंपनियां नहीं दे पाएंगी डॉक्टरों को महंगे तोहफे..!

News18Hindi
Updated: February 27, 2017, 4:33 PM IST
सरकार का कड़वा डोज, फार्मा कंपनियां नहीं दे पाएंगी डॉक्टरों को महंगे तोहफे..!
दवा प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने के लिए फार्मा कंपनियों की ओर से डॉक्टरों को महंगे तोहफे देने पर रोक लग सकती है. सरकार इसकी सीमा भी निर्धारित कर सकती है.
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Updated: February 27, 2017, 4:33 PM IST
दवा प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने के लिए फार्मा कंपनियों की ओर से डॉक्टरों को महंगे तोहफे देने पर रोक लग सकती है. सरकार इसकी सीमा भी निर्धारित कर सकती है. फार्मा डिपार्टमेंट इस मामले में जल्द ही मार्केटिंग प्रैक्टिसिज के लिए यूनिफॉर्म कोड जारी कर सकता है. माना जा रहा है कि आदेश नहीं मानने पर लाइसेंस भी रद्द हो सकता है.

1000 रुपए से महंगे गिफ्ट पर रोक
नए नियम के तहत अब कंपनियां डॉक्टरों को 1000 रुपए तक के महंगे गिफ्ट्स लेने पर रोक लग सकती है. इसमें सेमिनार के नाम पर विदेश यात्रा, आउट डोर वैकेशंस और महंगे तोहफे और सुविधाएं भी शामिल हैं. यूनिफॉर्म कोड डिपार्टमेंट ऑफ फॉर्मास्युटिकल, ड्रग कंट्रोलर और नेशनल व स्टेट मेडिकल काउंसिल तैयार कर रही है.

हो सकता है लाइसेंस रद्द

सूत्रों की मानें तो यह प्‍लानिंग पूरी तरह से तैयार है. फार्मा डिपार्टमेंट जल्‍द ही इसे लेकर नया नोटिफिकेशन जारी कर सकता है. बताया जा रहा है कि नए नियम डॉक्टरों, दवा कंपनियों और केमिस्ट, होलसेलर्स और डीलर पर भी लागू होंगे. नियम तोड़े जाते हैं, तो पेनल्टी भी लगाई जा सकती है. डॉक्‍टर और फार्मा कंपनी दोनों का ही लाइसेंस रद्द किया जा सकता है. इन नियमों को लेकर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और हेल्‍थ मिनिस्‍ट्री से भी चर्चा की गई है.

पहले भी आया था यूनिफॉर्म कोड  
फार्मा कंपनियों के लिए इस तरह का यूनिफॉर्म कोड  2014 में पहले भी लाया गया था, लेकिन वह प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाया. इधर इस साल मोदी सरकार ने बजट में इसकी गाइड लाइन को लेकर चर्चा की थी और, इस बात का एलान किया था कि लोगों को स्‍तरीय और सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जाएं.

इसलिए लग सकती है रोक
दरअसल, सरकार यह रोक फार्मा कंपनियों और डॉक्टरों के बीच लगातार बढ़ती सांठ-गांठ को देखते हुए लगा सकती है. सरकार का मानना है कि डॉक्टरों और फार्मा कंपनियों के मिले होने से पेशेंट को ना केवल महंगी दवाइयां मिलती हैं, बल्कि उसे परेशानी भी उठानी पड़ती है, क्योंकि कई बार फार्मा कंपनियों के दबाव में डॉक्टर्स वे दवाइयां लिखते हैं, जिनकी जरूरत पेशेंट को नहीं होती है.

(hindi.moneycontrol.com से साभार)
First published: February 27, 2017
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