अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत के जीडीपी आंकड़ों पर जताया शक

आईएएनएस

Updated: March 7, 2017, 10:36 PM IST
facebook Twitter google skype whatsapp

अमेरिकी आर्थिक रेटिंग एजेंसी 'फिच रेटिंग्स' ने भारत सरकार द्वारा पिछले दिनों जारी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के अग्रिम अनुमान के आंकड़ों पर आश्चर्य जाहिर किया है. फिच ने सरकार के आंकड़ों पर शक जाहिर करते हुए कहा है कि नोटबंदी के फैसले के बाद देश भर सार्वजनिक सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं हैं इसलिए ये आंकड़ें असल स्थिति से मेल खाते नज़र नहीं आ रहे हैं. बता दें कि मोदी सरकार ने दिसंबर में खत्म हुई तिमाही में जीडीपी दर 7 फीसदी होने का अनुमान लगाया गया है।

फिच ने अपनी नई वैश्विक आर्थिक परिदृश्य (जीईओ) रिपोर्ट में कहा है कि ये आंकड़े ज़मीन पर मौजूद स्थिति से मेल नहीं खा रहे हैं. एजेंसी के मुताबिक सरकार ने ही नोटबंदी के बाद सार्वजानिक सेवाओं और गतिविधियों से संबंधित आंकड़े जारी किए हैं, इन्हीं में मांग और सेवा गतिविधियों के कमजोर होने की बात कही गई है जो सभी नकदी आधारित हैं.

अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत के जीडीपी आंकड़ों पर जताया शक
फिच ने सरकार के आंकड़ों पर शक जाहिर करते हुए कहा है कि नोटबंदी के फैसले के बाद देश भर सार्वजनिक सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं हैं इसलिए ये आंकड़ें असल स्थिति से मेल खाते नज़र नहीं आ रहे हैं.

फिच के मुताबिक सरकार ने जीडीपी के जो आंकड़े जारी किए हैं वो इसके बिलकुल उलट हैं और बताते हैं कि अक्टूबर-दिसंबर में निजी खपत में मजबूती आई थी. रेटिंग एजेंसी के मुताबिक ये असामनता ही शक को और मजबूत कर रही है. हालांकि एजेंसी ने ये भी कहा है कि ऐसे आंकलन में गलतियों की संभावना भी बनी रहती है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी के बावजूद औपचारिक क्षेत्र भी आश्चर्यजनक रूप से मजबूत बना हुआ है. इससे यह संभावना बढ़ जाती है कि इन शुरुआती अनुमानों में नोटबंदी के प्रभाव को कम करके आंका गया हो, इसलिए आगे जारी होनेवाले आधिकारिक आंकड़ों में संशोधन की संभावना है. फिच का मानना है कि वित्त वर्ष 2016-17 में देश की जीडीपी 7.1 रहेगी, जबकि वित्त वर्ष 17-18 और वित्त वर्ष 18-19 दोनों में यह 7.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है.

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने पिछले हफ्ते अनुमान लगाया था कि दिसंबर में समाप्त हुई तीसरी तिमाही में भारत का सकल घरेलू उत्पाद 30.28 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जिसमें पिछली तिमाही में 7.3 फीसदी की तुलना में 7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। 2015-16 की इसी तिमाही में देश ने 28.31 लाख करोड़ रुपये का जीडीपी दर्ज किया था.

2016-17 के पूरे वित्त वर्ष के लिए जीडीपी विकास दर का अनुमान 7.1 फीसदी लगाया गया है, जबकि वित्तवर्ष 2015-16 में यह 7.9 फीसदी थी. इस गिरावट के बावजूद सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है.

First published: March 7, 2017
facebook Twitter google skype whatsapp