जिंदगी को जीने का सही तरीका बताएगा ये एजुकेशनल कोर्स!

News18India.com
Updated: October 9, 2016, 9:22 AM IST
जिंदगी को जीने का सही तरीका बताएगा ये एजुकेशनल कोर्स!
लाइफ, जिंदगी, जीवन, जन्म, मुत्यु, भविष्य, कर्म, भाग्य, विवाह, रिश्ता, संबन्ध, प्यार, नफ़रत, दोस्त, दुश्मन, तंदुरुस्ती, बीमारी, पागलपन, क्रोध, लोभ, दया, संतोष.....
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Updated: October 9, 2016, 9:22 AM IST
लाइफ, जिंदगी, जीवन, जन्म, मुत्यु, भविष्य, कर्म, भाग्य, विवाह, रिश्ता, संबन्ध, प्यार, नफ़रत, दोस्त, दुश्मन, तंदुरुस्ती, बीमारी, पागलपन, क्रोध, लोभ, दया, संतोष..... और ऐसे कई सारे शब्द हमारे जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन क्या वाकई में हम इन शब्दों का सही अर्थ जानते हैं?... नहीं। हम हमारे जिंदगी के 15 साल स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई के लिये देते हैं, लेकिन हमारी पढ़ाई इन शब्दों के साथ नहीं जुड़ी है।

डॉक्टर बनने के लिये हम मेडिकल कॉलेज में जाते हैं, इंजीनियर बनने के लिए हम इन्जीनियरिंग कॉलेज, अकाउन्टेन्ट बनने के लिए कॉमर्स कॉलेज, टीचर बनने के लिए बीएड कॉलेज वगैरा-वगैरा... लेकिन जीवन जीने का तरीका सीखने के लिये, कोई स्कूल या कॉलेज नहीं है। हम सोचते हैं ये सारी चीजे हमें मां-बाप से पता चलनी चाहिये, लेकिन क्या हमारे माँ-बाप इन शब्दों के बारे में जानते है....? ठीक से नहीं.....।

हम हमेशा गलती करके पछताते हैं, या उस गलती से सीखते हैं। लेकिन सिर्फ सीखने के लिए ही गलती करो, ये बात ठीक नहीं। और गलती से हमें कैसे सीखना चाहिये, ये कौन और कैसे बतायेगा...?

खैर! इन सवालों को पढ़ो......

1. जिंदगी जीने का सही तरीका क्या है?

2. हम शरीर को सशक्त और रोग मुक्त कैसे बना सकते हैं?

3. खुशहाल जिंदगी जीने के लिये हमें कितने पैसों की आवश्यकता होती है?

4. भगवान में विश्वास रखने से मेरा क्या फ़ायदा होगा? और भगवान को न मानने से मेरा क्या नुकसान होगा.....?

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हम सभी ऐसे सवालों के ज़वाब खोजते रहते हैं, लेकिन सही जवाब नहीं मिल पाते...। और इन्हीं चीज़ों को सिखाने के लिये भारतीय विद्या भवन ने एक साल का पाठ्यक्रम बनाया है, “Diploma in Holistic Living”। ज़िंदगी कैसी जीनी चाहिए इसका संदर्भ हमें वेदों में और उपनिषदों में मिलता है, लेकिन आज के युग में इन चीजों को कॉलेज में जाकर सीखना संभव नहीं है। इसलिये इसी ज्ञान को सरल और सुगम भाषा में सिखाने का पाठ्यक्रम भारतीय विद्या भवन ने तैयार किया है। यह पाठ्यक्रम साल में दो बार शुरू होता है। हर साल 26 जनवरी और 15 अगस्त के बाद, आने वाले रविवार को ये पाठ्यक्रम शुरू होता है, और एक साल चलता है। इसकी क्लासेज हर रविवार सुबह 10 बजे से 1 बजे तक होती है। कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र 16 साल से अधिक है, वो इस कोर्स में भाग ले सकता है।
अधिक जानकारी के लिये www.bharatiyavidya.com देखें।
First published: October 9, 2016
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