सीए के सिलेबस में बड़ा बदलाव, और मुश्किल होगी यह परीक्षा…

News18India.com

Updated: October 25, 2016, 12:45 PM IST
facebook Twitter google skype whatsapp

नई दिल्ली। देश को अधिक से अधिक बेहतर ऑडिटर्स और अकाउंटेंट्स की जरूरत को देखते दुए इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) करीब एक दशक बाद जल्‍द ही सीए कोर्स में और इसके परीक्षा पैटर्न में बदलाव कर सकता है। इन प्रस्‍तावित बदलावों की रूपरेखा तैयार कर ली गई है पर माना जा रहा है कि इन नए बदलावों से सीए बनने की राह और कठिन हो जाएगी। इस बदलाव के तहत संस्थान अब सिलेबस में नए विषयों को शामिल करने के साथ-साथ ओपन बुक टेस्ट भी शुरू करने जा रहा है।

सीए के सिलेबस में बड़ा बदलाव, और मुश्किल होगी यह परीक्षा…
देश को अधिक से अधिक बेहतर ऑडिटर्स और अकाउंटेंट्स की जरूरत को देखते दुए इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) करीब एक दशक बाद जल्‍द ही सीए कोर्स में और इसके परीक्षा पैटर्न में बदलाव कर सकता है।

गौरतलब है कि चार्टर्ड अकाउंटेंसी का कोर्स तीन स्तर पर बंटा हुआ है। इसमें पहला है कॉमन प्रोफिसिएंसी टेस्ट जिसे सरल भाषा में लोग सीपीटी कहते हैं। दूसरा है, इंटीग्रेटिड प्रोफेशनल काम्पीटेंसी कोर्स (आईपीसीसी) और तीसरी अंतिम परीक्षा होती है। अब नए सिलेबस के मुताबिक सीपीटी को और कठिन किया जा रहा है। इसके तहत फाउंडेशन कोर्स में दो नए विषय शामिल किए जा रहे हैं। सीपीटी में अब बहुविकल्पीय प्रश्नों के साथ व्याख्यात्मक सवाल भी होंगे। फाउंडेशन कोर्स में दो नए विषय बिजनेस कॉरस्पोंडेंस एंड रिपोर्टिग और बिजनेस एंड कमर्शियल नॉलेज शामिल किए जा रहे हैं। सीए के लिए अब 10वीं की बजाय 12वीं से रजिस्ट्रेशन होगा। विद्यार्थियों को फाउंडेशन परीक्षा के बाद चार माह की पढ़ाई करनी होगी। नए कोर्स के अनुसार अब सीए फाउंडेशन कोर्स का पेपर 200 अंकों की बजाए 400 अंकों का होगा। इसमें ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव दो पेपर होंगे,जो 200-200 अंकों के होंगे। पहले केवल 200 अंकों का ऑब्जेक्टिव पेपर होता था।

इसी तरह आईपीसीसी के स्तर पर इकोनोमिक्स फोर फाइनेंस विषय को जोड़ गया है। इसके अलावा अंतिम परीक्षा में भी विद्यार्थियों को और विकल्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें रिस्क मैनेजमेंट, इंटरनेशनल टेक्सेशन, फाईनेंशियल सर्विसेज एंड कैपिटल मार्केट्स, ग्लोबल फाईनेंशियल रिपोर्टिग स्टैंडर्ड, इकोनोमिक्स लॉ एंड मल्टी डिसिप्लीनरी केस शामिल हैं। ये पेपर ओपन बुक टेस्ट पर आधारित होंगे और सवाल केस स्टडीज से पूछे जाएंगे।

आईसीएआई के अध्यक्ष एम. देवराजा रेड्डी की राय

आईसीएआई के अध्यक्ष एम. देवराजा रेड्डी के मुताबिक ग्लोबलाइजेशन की वजह से दुनियाभर में टैक्सेशन और फाइनांस के अवसर मिल रहे हैं। हालांकि, यह चार्टर्ड अकाउंटेंसी पेशे के लिए चुनौती बनकर आया है। इसके अतिरक्त देश में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंटरनेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिग स्टैंडर्डस (आईएफआरएस) के कारण भी आईसीएआई को अपने पाठय़क्रम में बदलाव करने की जरूरत महसूस हुई है। उन्होंने कहा कि आईएफआरएस को व्यापार और वित्त मामले की एक कॉमन भाषा के रूप में विकसित किया गया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंपनियों के अकाउंट की तुलना हो सके।

सीए करने वाले विद्यार्थियों को अब तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। तकनीकी प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को व्यक्तिगत विकास और सॉफ्ट स्किल आदि के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। इसके अतिरिक्त इंफोर्मेशन सिस्टम कंट्रोल एंड ऑडिट का नाम बदलकर इंफोर्मेशन सिस्टम रिस्क मैनेजमेंट एंड ऑडिट किया जाएगा। यह एडवांस्ड इंटीग्रेटिड कोर्स का हिस्सा होगा। गौरतलब है कि इस साल अप्रैल में ही केन्द्र सरकार ने सीए को सिलेबस में बदलाव को मंजूरी दी थी।

क्या कहते हैं छात्र-

सीए आईपीसीसी के छात्र अखिल का कहना है कि सिलेबस में बिजनेस कॉरस्पोंडेंस एंड रिपोर्टिग जोड़ने से व्यवहारिक ज्ञान को बढ़ावा मिलेगा लेकिन इस नए नियम से अब सीपीटी पास करना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। वहीं, आईपीसीसी के ही एक और छात्र आरजू शर्मा ने कहा कि बिजनेस एंड कमर्शियल नॉलेज को जोड़ने से छात्रों का रुझान इस तरफ बढ़ेगा जो आगे भविष्य में काफी काम आएगा। हालांकि, इसके विपरीत सीए फाइनल की छात्रा कनिका अरोड़ा का कहना है कि नए सिलेबस से अब अपेक्षाकृत ज्यादा प्रोफेशनल छात्रों का चयन करना आसान हो जाएगा लेकिन हिंदीभाषी क्षेत्रों के ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले छात्रों का प्रतिनिधित्व अब कम हो सकता है।

विशेषज्ञों की राय

दिल्ली में स्थित अग्रणी शैक्षणिक संस्थान नॉलेज फर्स्ट एजुकेशनल के डायरेक्टर और शिक्षक सीएस सुजीत झा का कहना है कि विदेशों में इंडियन चार्टर्ड अकाउंटेंट की मांग को देखते हुए कोर्स के सिलेबस में बदलाव एक सही फैसला है और इससे विदेशों में भी सीए की साख बढ़ेगी। झा ने कहा कि वर्तमान की जरूरतों को देखते हुए यह बदलाव काफी जरूरी था। एक और विशेषज्ञ और काउंसिल सदस्य सीए राजेश शर्मा का कहना है कि यह बदलाव साकारात्मक है,साथ ही उन्होने कहा कि स्टूडेंट्स नए पैटर्न को लेकर परेशान न हों, क्योंकि उन्हें नया स्टडी मटेरियल भी उपलब्ध कराया जाएगा।

First published: October 25, 2016
facebook Twitter google skype whatsapp