सक्सेस स्टोरी: मरीज को राहत दिलाने की सोच से निकला बिजनेस आइडिया

ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: November 9, 2016, 7:00 PM IST
सक्सेस स्टोरी: मरीज को राहत दिलाने की सोच से निकला बिजनेस आइडिया
आइडिया आया कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए कि दूरदराज के मरीज की पूरी हिस्ट्री डॉक्टर को आसानी से बिना उसके पास जाए, पता चल जाए।
ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: November 9, 2016, 7:00 PM IST
नई दिल्ली। झारखंड की रहने वाली 40 वर्षीय डॉ. शिखा सुमन की मां को ब्रेन हैमरेज हो गया था। उनका दिल्ली में इलाज शुरू हुआ लेकिन वो कोमा में चली गईं। उनकी जांच रिपोर्ट दिखाने के लिए शिखा को बार-बार दिल्ली आना पड़ता था। पूरी रिपोर्ट के कागजात डॉक्टर को बार-बार दिखाने पड़ते। इस समस्या ने शिखा को समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। आइडिया आया कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए कि दूरदराज के मरीज की पूरी हिस्ट्री  डॉक्टर को आसानी से बिना उसके पास जाए, पता चल जाए।

इस आइडिया को जमीन पर उतारकर शिखा ने मेडिमोजो नाम की कंपनी खड़ी कर दी। इसमें साथ दिया भागलपुर निवासी उनके कॉलेज के दोस्त विकास रंजन ने। उन्होंने इसके लिए एक एप बनाया, जिसमें मेडिकल रिकॉर्ड ग्राफिकल फार्मेट में डॉक्टर के सामने होता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को बार-बार डॉक्टर के पास नहीं जाना पड़ता। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है। करीब 10 माह में ही पांच लोगों की टीम वाली ये कंपनी तीन करोड़ रुपये की कंपनी बन गई है। आईआईटी कानपुर से पीएचडी शिखा बताती हैं कि यह आइडिया लेकर वह और इंश्योरेंस सेक्टर में काम कर चुके उनके साथी विकास रंजन दिल्ली की स्टारर्टअप टनल नामक संस्था के पास गए। उसके लोगों को आइडिया अच्छा लगा। फिर यहीं से धन भी मिला और बैठने की जगह भी।

दिल्ली यूनिवर्सिटी से बिजनेस इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएट रंजन ने नौकरी छोड़ इस काम में ताकत लगाई। छतरपुर स्थित इसी संस्था के कार्यालय में बैठने की जगह मिल गई। वहां इसके लिए मेंटर भी मिला। वहां स्टार्टअप के लिए वर्क स्टेशन बनाया गया है। वहीं से 10 लाख रुपये से इसकी शुरुआत की। आज इस कंपनी का एप करीब 40 हजार लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। सबसे ज्यादा लोग झारखंड और बिहार के हैं।

ऐसे काम करता है एप

शिखा ने बताया कि मेडिकल रिकॉर्ड की फोटो लीजिए और मेडिमोजो प्लेटफार्म पर अपलोड कर दीजिए। सारी रिपोर्ट को मशीन लर्निंग सिस्टम से डेटा पुलआउट करके उसे हम ग्राफिक फॉर्मेट में दिखा देते हैं। अगर आपने साल में 10 बार कौलेस्ट्राल चेक कराया तो उसका ग्राफ बन जाएगा कि किस माह में कितना रहा और वह बढ़ रहा है या फिर घट रहा है। इससे पेशेंट और डॉक्टर दोनों को समझना आसान हो जाता है। मशीन आपका रिकॉर्ड एनालाइज करती है।

युवाओं के लिए पांच मंत्र

-यह समझना बहुत जरूरी है कि क्या और क्यों करने जा रहे हैं।

-लगन होनी चाहिए, देखना चाहिए कि रिस्क लेने की क्षमता है या नहीं।

-आपको बाजार में नए आइडिया के साथ जाना है, नई लकीर खींचनी है इसलिए जो करें आत्मविश्वास के साथ करें।

-देखें कि लोगों की कौन सी जरूरत बाजार पूरी नहीं कर रहा है। उसे ही कारोबारी अवसर में बदलने के लिए काम करें।

-इस समय सरकार और निजी सेक्टर दोनों स्टार्टअप को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं, इसका फायदा उठाइए।
First published: November 9, 2016
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