कवर्धा में जारी है समाधी लेने की संत की अनूठी परम्परा

Manish Mishra | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: July 16, 2017, 2:53 PM IST
कवर्धा में जारी है समाधी लेने की संत की अनूठी परम्परा
सतनामी समाज के संत की समाधी लेने की अनूठी परम्परा
Manish Mishra | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: July 16, 2017, 2:53 PM IST
छत्तीसगढ़ के कवर्धा के गांव घोठिया में सतनामी समाज के संत ने समाधी लेने की अनूठी परम्परा का आयोजन किया. इस परम्परा के जरिए संत आगरदास ने जमीन के भीतर जाकर 24 घंटे के लिए समाधी ली. संत का समाधी लेने का समय शनिवार की दोपहर 12 बजे से शुरू होकर रविवार 12 बजे को पूरा हुआ. परम्परा के पूरा होने के बाद संत को बाहर निकला गया.

सतनामी समाज हर साल इस अनूठे परम्परा का आयोजन करती है सतनामीअखाड़ा के संत अपनी शक्ति केअनुसार पांच,आठ,पंद्रह,चौबिस घंटे जैसे की समाधी लेते हैं.

सतनामी समाज की मान्यता है कि संगठन के गुरूअंबरदास ने भी समाधी ली थी. जिसकी याद में वे इस परम्परा का निर्वहन कर रहे हैं. हर साल सावन में इसका आयोजन किया जाता है. जिसमें शामिल होने दूर-दूर से समाज के अनुयायी और श्रद्धालु पहुंचते हैं.

समाधी लेने से 24 घंटे पहले कुछ भी खाया-पिया नहीं जाता है. पूजा स्थल में ही चार से पांच फिट गहरा जमीन की खुदाई कर समाधी बनाया जाता है.जिसमें बैठने की जगह रहती है.समाधी लेने वाले के बैठते ही चारों तरफ से ऊपर से कवर लगा दिया जाता है.उसके बाद समय पूरा होने पर कवर हटा दिया जाता है. समाधी लेने वाले के बाहर निकलने के बाद उसकी पूजा की जाती है. उसके द्वारा लोगों को उपदेश दिया जाता है.
First published: July 16, 2017
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