फैक्ट्रियों के जहरीले राख लोगों के लिए जानलेवा!

News18India

Updated: January 10, 2013, 1:35 PM IST
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मुजफ्फरनगर। कारखानों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला कचरा माहौल को जहरीला बना रहा है। सरकार और प्रशासन दावा करता है कि हालात काबू में हैं, लेकिन असलियत इससे ठीक उलट है। मुजफ्फरनगर के रहने योगेश कुमार बता रहे हैं कैसे उनके शहर में फैक्ट्रियों से निकलने वाली राख से लोगों की सेहत और पर्यावरण पर असर पड़ रहा है।

दरअसल मुज़फ्फरनगर में लगभग 30 पेपर मिल हैं। और इन पेपर मिलों से निकलने वाली राख की वजह से हम लोगों को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन फैक्ट्रियां निकलने वाली राख को फैक्ट्री मालिक जहां-तहां सड़क के किनारे ही फिकवा देते हैं। जिससे कई जगहों पर तो राख के बड़े टीले बन गए हैं।

फैक्ट्रियों के जहरीले राख लोगों के लिए जानलेवा!
कारखानों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला कचरा माहौल को जहरीला बना रहा है। सरकार और प्रशासन दावा करता है कि हालात काबू में हैं, लेकिन असलियत इससे ठीक उलट है।

इतना ही नहीं, राख उड़कर खेतों में गिरती है और फ़सलों को बर्बाद कर डालती है। किसानों की हज़ारों बीघा फसल खराब हो चुकी है। हद तो तब हो गई जब फ़ैक्ट्री वालों ने मुजफ्फरनगर से गुज़रने वाली गंगा और यमुना नदियों को भी नहीं बख्शा। नदियों के किनारे भी राख डाली जाती है, जो पानी को प्रदूषित करती है। साथ ही फैक्ट्रियों का गंदा पानी भी नालों के जरिए नदियों में ही उड़ेला जा रहा है। गंगा और यमुना के पानी के साथ-साथ इलाके का भूजल भी दूषित हो चुका है।

प्रभावित लोग इस सिलसिले में सालों से डीएम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। लोगों ने कई बार प्रदर्शन भी किए लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। लोगों की मांग है कि पेपर मिल अपने औद्योगिक कचरे के निस्तारण के लिए कोई ठोस नीति बनाएं और यूं खुले में कचरा फेंक कर पर्यावरण और लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ ना करें। लेकिन लोगों के लाख कोशिशों के बावजूद ना तो पेपर मिल मालिकों के खिलाफ या ठेकेदारों के खिलाफ़ कोई कार्रवाई हुई है।

First published: January 10, 2013
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