पॉन्टी हत्याकांड के मूल में हो सकती है ब्लैकमनी!

News18India
Updated: November 29, 2012, 4:09 PM IST
पॉन्टी हत्याकांड के मूल में हो सकती है ब्लैकमनी!
आईबीएन7 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस अब ये मान रही है कि इस हत्याकांड का सूत्रधार सुखदेव सिंह नामधारी ही है। यही वो शख्स है जिसने ऐसी परिस्थितियां तैयार कीं जिससे एक भाई का दूसरे भाई से झगड़ा हो।
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Updated: November 29, 2012, 4:09 PM IST
नई दिल्ली। कहां है उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन सुखदेव सिंह नामधारी का बेटा सुरेंद्र और मामा हरदयाल? पॉन्टी और हरदीप चड्ढा हत्याकांड की जांच कर रही पुलिस को है इन दो शख्स की तलाश। पुलिस सूत्रों का दावा है कि इनके पास है हत्याकांड का बड़ा राज।

आईबीएन7 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस अब ये मान रही है कि इस हत्याकांड का सूत्रधार सुखदेव सिंह नामधारी ही है। यही वो शख्स है जिसने ऐसी परिस्थितियां तैयार कीं जिससे एक भाई का दूसरे भाई से झगड़ा हो। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इसी साजिश के तहत नामधारी ने उत्तराखंड से अपने बेटे, मामा और अपने तीन दर्जन से ज्यादा लोगों को दिल्ली बुलाया। सवाल ये है कि आखिर क्यों किया नामधारी ने ऐसा।

पुलिस सूत्रों की मानें तो मामला अकूत कालेधन से जुड़ा है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस हत्याकांड की नींव इस साल फरवरी में पड़ी। सूत्रों के मुताबिक फरवरी में जब पॉन्टी को इनकम टैक्स छापे की खबर मिली तो उसने अपनी सारी नकदी नामधारी के पास रखवा दी। सूत्रों की मानें तो ये रकम करोड़ों में थी। यही नहीं दिल्ली पुलिस को जानकारी मिली है कि पॉन्टी ने देश-विदेश में नामधारी के नाम पर कई जमीनें खरीदीं। इनमें रुद्रपुर सब्जीमंडी की पचास एकड़ जमीन भी शामिल है।

पुलिस के सामने सवाल ये है कि क्या नामधारी इसी लालच का शिकार हुआ? क्या उसने भाई-भाई के झगड़े का फायदा उठाया? पुलिस सूत्रों के मुताबिक पॉन्टी ने नामधारी से कई बार अपने पैसे वापस मांगे लेकिन वो पैसे देने में आनाकानी करने लगा। इन पैसों के लालच को भाई-भाई के झगड़े ने एक और बड़ा मौका दिया।

पुलिस की मानें तो दिल्ली का बिजवासन और छतरपुर का फार्महाउस पॉन्टी के भाई हरदीप के कब्जे में था। पुलिस को शक है कि नामधारी ने पॉन्टी को फॉर्म हाउस पर कब्जे के लिए उकसाया। वो खुद पॉन्टी को लेकर 17 नवंबर को छतरपुर फार्म हाउस पहुंचा। जहां ये झगड़ा कातिलाना हो गया।

First published: November 29, 2012
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