दिल्ली में ऑटो के लिए रोड पर नियम, आप भी पढ़ लीजिए

News18India
Updated: January 16, 2013, 6:09 PM IST
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Updated: January 16, 2013, 6:09 PM IST
नई दिल्ली। देश की बेटी के साथ घिनौनी वारदात को एक महीना बीत चुका है। लेकिन सरकार को लगता है कि ऑटोवालों को सुधारने के लिए एक महीने का वक्त कम है। वो सार्वजनिक यातायात की स्थिति को एक महीने में पुख्ता नहीं कर सकती। दरअसल ऐसे हालात तो सालों से हैं, लोग सालों से शिकायत पर शिकायत कर रहे हैं। लेकिन सुनने वाला कोई नहीं। सवाल ये कि क्या सरकार ही नहीं चाहती कि हालात सुधरें और महिलाएं सुरक्षित हों।
दिल्ली में हुए गैंगरेप और हत्या के एक महीने बाद भी दिल्ली नहीं सुधरी है। घटना के बाद सुरक्षा और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को लेकर दिल्ली सरकार ने बड़े-बड़े दावे किये और दिल्लीवालों को ये विश्वास दिला दिया कि अब हर हाल में हालात सुधरेंगे। घटना के एक महीने बाद वही दिल्ली सरकार कह रही है कि गैंगरेप से ऑटो का कोई लेना देना नहीं है और महीनेभर में सब कुछ नहीं बदला जा सकता। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को लेकर दिल्ली सरकार ने कड़े नियम बना रखे हैं लेकिन ऑटो वाले अभी भी खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं और लोगों को लूट रहे हैं। ऑटो वाले इतने बेखौफ हैं कि आज एक ट्रैफिक कांस्टेबल की धुनाई कर दी।

ऑटो वालों की गुंडागर्दी का शिकार इस बार दिल्ली पुलिस के ट्रैफिक कांस्टेबल मूलचंद बने हैं। सिपाही मूलचंद पूर्वी दिल्ली के विकास मार्ग पर तैनात थे। यहां एक सामान ढोने वाले ऑटो ने नो एंट्री में घुसने की कोशिश की। सिपाही मूलचंद ने उसे रोक लिया। सिपाही ने चालान करने के लिए कागजात मागें तो ऑटो में सवार लोग आग बबूला हो गए। उन्होंने मूलचंद पर हमला कर दिया। हमलावर फिलहाल फरार हैं। घायल सिपाही को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दिल्ली के ऑटो वाले इतने बेखौफ हैं कि उन्हें वर्दी का भी खौफ नहीं।

ऐसे में आखिर कैसे आम लोगों की सुरक्षा की गारंटी देगी दिल्ली पुलिस। दिल्ली गैंगरेप कांड के बाद अब इस घटना ने भी दिल्ली में ऑटो वालों की मनमानी और पुलिस के सुस्त रवैये की पोल खोल दी है। आईबीएन7 ने इसी की पड़ताल की। और ये सच सामने आया कि कुछ नहीं बदला। अभी भी सड़क ऑटो पकड़ना एक जंग लड़ने जैसा है।

सरकार के लिए महीने भर कम हैं। लेकिन ये तो सालों से चल रहा है। ऑटो वाले मनमाना किराया वसूलते हैं। जहां आप जाना चाहते हैं वहां जाने के लिए मना करते हैं। मीटर से चलने को तैयार नहीं होते। आखिर इनके लिए कोई कायदा कानून क्यों नहीं है।

जबकि नियम के मुताबिक वो किसी सवारी को ले जाने से मना नहीं कर सकता।
उन्हें मीटर से ही चलना चाहिए, अगर ऑटो खाली है तो हाथ देने पर उसे रुकना ही होगा। ऑटो ड्राइवर के पास लाइसेंस और बैच होना जरूरी है। रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक ऑटो वाले केवल 25% एक्सट्रा चार्ज कर सकता है। लैगेज के लिए केवल 7 रुपये 50 पैसे ही चार्ज कर सकता है। पहले 2 किलोमीटर के लिए केवल 19 रुपये चार्ज करेगा। ऑटो वाले को यूनिफार्म पहनना जरूरी है।

हालांकि पुलिस दावा कर रही है कि पिछले साल लगभग साढ़े तीन हजार मना करने वाले ऑटो वालों के खिलाफ चालान किया गया जबकि साढ़े नौ हजार ऑटो पिछले साल जब्त हुए हैं। लेकिन पुलिस की ये कार्रवाई भी ऑटो वालों की मनमानी नहीं रोक पा रही है। क्या दिल्ली पुलिस और सरकार इतनी कमजोर है कि इनपर लगाम भी नहीं लगा सकती।


First published: January 16, 2013
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