जब जुड़ी 'तिनका-तिनका उम्मीद' तो बोलने लगी डासना जेल की दीवार!

अजय भारती | News18India.com
Updated: January 11, 2016, 7:35 PM IST
अजय भारती | News18India.com
Updated: January 11, 2016, 7:35 PM IST
डासना। दीवारों के बारे में कहा जाता है कि उनके कान होते हैं लेकिन गाजियाबाद की एक दीवार सुन नहीं रही बल्कि बोल रही है। रिश्तों के बारे में कुछ कह रही है। खास बात ये कि ये दीवार किसी आम इमारत की नहीं बल्कि उस डासना जेल की है जिसका नाम लेते ही सबसे पहले  जुर्म की कहानियां और उनमें लिप्त चेहरों की खौफनाक तस्वीरें ही जहन में आती हैं लेकिन इन तस्वीरों के अलावा भी जेल और वहां बंद कैदियों की एक अलग सच्चाई है जिसे जानी-मानी पत्रकार और जेल सुधार एक्टिविस्ट वर्तिका नंदा ने न सिर्फ पहचाना बल्कि उसे निखारकर शनिवार को अपनी अभिनव पहल 'तिनका-तिनका डासना' के तहत सबसे सामने पेश भी किया। 'तिनका-तिनका डासना' के तहत कैदियों की कृतियों से तैयार कैलेंडर और 3-डी वॉल पेंटिंग का आज जेल में ही अनावरण किया गया।

ये 3-डी वॉल पेंटिंग विशाखापत्तनम के रहने वाले विवेक स्वामी व किशन, संजय और दीपक ने तैयार की है। इसके अलावा 6 पन्नों का कैलेंडर भी काफी आकर्षक है। ग्राफिक्स डिजाइनर एंड फोटोग्राफर मोनिका सक्सेना ने इस कैलेंडर को डिजाइन किया है। कैलेंडर के अनावरण के दौरान डासना जेल के अधीक्षक शिव प्रकाश यादव, जेलर आर एस यादव, उप जेलर शिवाजी यादव, आनंद पांडे आदि गणमान्य अधिकारी मौजूद थे।

संवाददाता सम्मेलन में जेल अधीक्षक शिव प्रकाश यादव ने कैलेंडर और 3-डी वॉल पेंटिंग की जमकर तारीफ की। उन्होंने जेल बंदियों की इस कार्य में मदद करने के लिए वर्तिका नंदा के प्रयासों को सराहा। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी कैदियों की रचनात्मक क्षमता को उभारने के प्रयास किए जाएंगे।
इस मौके पर वर्तिका नंदा ने बताया कि कैलेंडर और 3-डी पेंटिंग तैयार करने में करीब साढ़े पांच महीने का समय लगा। कैलेंडर जारी करने के पीछे उनका उद्देश्य जेल बंदियों के रचनात्मक पक्ष को दुनिया के सामने लाना है, जो चहारदीवारी में कैद होने के बाद दब गया था।

वर्तिका ने कहा कि जेल कैदी का जिक्र होते ही लोग अलग सा बर्ताव करने लगते हैं।  लेकिन हर कैदी की अपनी डिग्निटी है। उसका सम्मान है। रिहा होने के बाद जब वह अपनों के बीच जाता है तो समाज उसे कैदी की नजर से न देखे बल्कि एक ऐसे इंसान के रूप में देखे जो अपने किए का दंड भुगतकर एक नया जीवन शुरू करने वाला है।

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वर्तिका के मुताबिक जेल में कैदियों के पास काफी समय होता है, वो एकांत में निरंतर सोचते रहते हैं। इसी का परिणाम है कि दुनिया के बेहतरीन साहित्य जेल में ही लिखे गए। इस काम को लेकर आई चुनौतियों के बारे में वर्तिका ने बताया कि बाहर के लोगों पर बंदी भरोसा नहीं करते। कैदियों का खाली समय नेगेटिविटी से भरा होता है। उन्हें कैसे प्रोत्साहित किया जाए, ताकि वे अपने जीवन के मूल्य को समझ सकें इसीलिए मैं एक एक्टविस्ट के तौर पर अपने प्रयासों को निरंतर इस दिशा में आगे बढ़ा रही हूं।

वर्तिका नंदा ने बताया है कि अभी फिलहाल इस प्रोजेक्ट के तहत 3-डी पेंटिंग को भी जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि इस प्रोजक्ट के तहत गाने से लेकर कविता और फिर एक किताब को जारी किया जाएगा। उन्होंने जेल के तमाम अधिकारियों के सहयोग के लिए भी धन्यवाद दिया।

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पेंटिंग के बारे में वर्तिका नंदा ने बताया कि दीवार पर बनाई गई यह पेंटिंग करीब 10 साल तक इसी तरह बनी रहेगी। इस पेंटिंग का एक सिरा अंधेरे में है जहां चांद और सितारे दिन में जगमगाते दिखेंगे। दूसरे सिरे में उस गाने के अंश है जिसे वर्तिका ने लिखा है। इस पेंटिंग में दस स्तंभ हैं जो दस रिश्तों को दर्शाते हैं। इन स्तंभ पर लिखे नाम उन बंंदियों के सगे संबंधियों से जुड़े हुए हैं, जिनकी उन्हें याद आती है।

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गौरतलब है कि वर्तिका नंदा इससे पहले भी देश की सबसे सुरक्षित और हाईटेक माने जाने वाली जेल तिहाड़ के कैदियों के साथ काम कर चुकी हैं। वहां के अनभुवों पर उन्होंने एक किताब 'तिनका तिनका तिहाड़' लिखी है। कविता संग्रह के रूप में यह किताब अपने आप में अनूठी है। इसी वजह से यह किताब लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुकी है। 'रानियां सब जानती हैं, हूं... थी... रहूंगी' नामक किताबें भी वर्तिका लिख चुकी हैं।

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 (डासना जेल की दीवार पर 3डी पेंटिंग तैयार करने वाले कलाकार)

First published: January 9, 2016
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