भातू गिरोहः ब्रांडेड जींस-शर्ट पहनकर देते हैं चोरी को अंजाम!

News18Hindi
Updated: July 14, 2017, 7:00 PM IST
भातू गिरोहः ब्रांडेड जींस-शर्ट पहनकर देते हैं चोरी को अंजाम!
Criime, Crime in UP: मुरादाबाद, मेरठ व कानपुर में पाए जाते हैं भातू
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Updated: July 14, 2017, 7:00 PM IST
अगली बार जब कोई ब्रांडेड जींस-शर्ट, स्पोटर्स शूज पहने और मंहगे मोबाइल के साथ सड़क पर दिख जाए और उसकी अमीरी पर रश्क खाए बिना आगे बढ़ जाइए. क्योंकि वह शख्स चोरी और डकैती में माहिर भातु गिरोह का सदस्य हो सकता है. जी हां, इन ब्रांड कांसेस गिरोह की खूबी यही है.यूपी के मुरादाबाद, मेरठ और कानपुर में सक्रिय भातू गिरोह की शानो-शौकत ऐसी होती है कि एक उद्योगपति का लड़का भी इन्हें देखकर शरमा जाए. इनकी लाइफ स्टाइल से कोई भी पहली नजर में धोखा खा जाता है और हाव-भाव से तोअंदाजा भी लगाना मुश्किल होता है कि वाकई में ये पेशेवर चोर होंगे.

गिरोह छोटी-मोटी चोरी में नहीं डालता हाथ
भातू गिरोह की सबसे बड़ी खासियत है कि यह गिरोह छोटी-मोटी चोरियां में हाथ नहीं डालता. यह गिरोह हमेशा बड़ी चोरी की ताक में रहता है. लाखों-करोड़ों की चोरी में माहिर यह गिरोह कई वर्षों में एक-दो बार ही पुलिस की गिरफ्त में आते हैं. चोरी में माहिर हों भी क्यों न, आखिर इनके घर-परिवार की कई पीढ़ियां चोरी का काम बेहद पेशेवर तरीके से करते आ रहे हैं. लेकिन भातू गिरोह के बारे में एक बात जो सबसे अलग है, वह है इस गिरोह का लाइफ स्टाइल. यही कारण है कि इनकी वेशभूषा से अच्छे
से अच्छा होशियार आसानी से गच्चा खा जाता है.

मुरादाबाद, मेरठ व कानपुर में है सक्रिय 
भातू बहुत ही पुरानी जाति है. जानकारों की मानें तो इस जाति के लोग अब भी बड़ी संख्या में मुरादाबाद, मेरठ और कानपुर में पाए जाते हैं. भातू की तरह से ही हाबूड़ा, बावरिया और धतुरा जातियों के लोग भी बड़ी संख्या में लोग कानपुर व उसके आसपास रह रहे हैं. जानकार बताते हैं कि वर्ष 1945 से पहले अंग्रेज अफसरों ने इन जातियों के रहन-सहन और पेशे के तरीके से परेशान होकर भातू जाति को कानपुर में सीटीएस कॉलोनी में बसा दिया था, जहां आज भी वो रह रही हैं जबकि कुछ लोग सीटीएस कॉलोनी
से निकलकर दूसरे शहरों में भी बस गए हैं.

मोहन भातू है गिरोह का सरगना
मेरठ से भातू गिरोह को चलाने वाला मोहन भातू गिरोह का सरगना है. मोहन के गिरोह पर चोरी और लूट के करीब 150 मामले अलग-अलग राज्यों के जिलों में दर्ज हैं. अकेले मोहन के गिरोह की बात करें तो गिरोह में करीब छह सदस्य हैं. सभी भातू जाति के हैं और आपस में रिश्तेदार हैं. इसमें से गिरोह का एक सदस्य प्रमोद भातू वृंदावन का रहने वाला है और बाकी के लोग मेरठ के हैं.

10 साल बाद पकड़े गए गिरोह के सदस्य
हाल ही में तकरीबन 10 साल बाद मोहन भातू सहित गिरोह के तीन सदस्य गाजियाबाद पुलिस ने गिरफ्तार किए गए हैं. यह गिरोह पुलिस से बचने के लिए एक खास रणनीति के तहत चोरियां करता है. पुलिसिया पूछताछ में गिरोह के सदस्यों से बताया कि गिरोह यूपी के बजाए राजस्थान, हरियाणा और तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के राज्यों में ज्यादा चोरियां करता है.

गिरोह के खिलाफ तमिलनाडु में दर्ज हैंं 48 केस
इस गिरोह की ओर से तमिलनाडु में कई बड़ी-बड़ी चोरियों को अंजाम दिया गया है. अब तक इस गिरोह के खिलाफ दर्ज 150 में से करीब 48 मामले तमिलनाडु में दर्ज हैं. इस संबंध में गिरोह सरगना मोहन ने पुलिस को बताया है कि किसी दूसरे राज्य में वारदात कर अपने शहर में आकर छिपना ज्यादा आसान हो जाता है. लेकिन अगर हम अपने ही जिले और राज्य में चोरी करते हैं तो पकड़े जाने की ज्यादा संभावना रहती है.

हाई फाई स्टाइल में करते हैं चोरी
चोरी करने के मामले में गिरोह बेहद ही शातिर बताया जाता है. तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के दूसरे शहरों में चोरी करने के लिए गिरोह के सभी सदस्य हाई फाई स्टाइल में रहते हैं. अगर तमिलनाडु में चोरी करनी है तो दिल्ली से फ्लाइट में जाते थे. शहर में पहुंचने के बाद शानदार फाइव स्टार होटल में ठहरते थे. जहां चोरी करनी होती थी, वहां तीन-चार दिन तक उस मकान की रेकी करते थे फिर उसके बाद चोरी की वारदात को अंजाम देते थे.

गिरोह के गुर्गे चोरी करने के बाद प्रायः दो-तीन दिन और उसी होटल में रुकते थे. चोरी की घटना के बाद पुलिस छोटे होटलों और रेलवे-बस स्टेशन पर तो तलाशी अभियान चलाती थी, लेकिन फाइव स्टार होटलों की ओर कभी ध्यान नहीं जाता था. बस इसी का फायदा उठाकर गिरोह शहर में मामला ठंडा पड़ने पर फ्लाइट से दिल्ली आ जाते थे.

करोड़पति हैं भातू गिरोह के सदस्य
पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के सदस्य करोड़पति हैं. गिरोह के पास वृंदावन और मेरठ में कई आलीशान कोठियां हैं. गिरोह का एक सदस्य प्रमोद वृंदावन में एक फ्लैट में रहता है. फ्लैट की कीमत भी 50 लाख रुपये से ऊपर बताई जा रही है.

वहीं मेरठ के एक घर से जाइलो कार और तीन स्पोर्टी बाइक भी बरामद हुई हैं. पकड़े गए तीनों सदस्यों के पास से महंगे-महंगे मोबाइल फोन भी मिले हैं. वहीं, करीब पौने दो लाख रुपये नकद मिले हैं. पुलिस गिरोह की अभी और संपत्तियों की जांच कर रही है. अनुमान है कि अभी कई करोड़ की दूसरी संपत्तियां भी सामने आ सकती हैं.

सीसीटीवी कैमरे से पकड़ा गया गिरोह
भातू गिरोह चोरी और लूट की वारदात को ही अंजाम देता है. कहा जाता है कि गिरोह लूट के लिए किसी के साथ मारपीट नहीं करता है. एक दिन इस गिरोह के दो सदस्य गाजियाबाद के इंदिरा नगर क्षेत्र से गुजर रहे थे. तभी उन्हें एक कार में एक बैग रखा हुआ दिखा.

बैग को उड़ाने के चक्कर में उन्होंने कार के दरवाजे का शीशा निकालकर बैग पार कर दिया. बैग में दो लाख रुपये थे. बैग चोरी की रिपोर्ट दर्ज हुई सीसीटीवी कैमरे को खंगाला गया. गिरोह सदस्यों की तस्वीर कैमरे में कैद हो गईं थी और उसी फुटेज के आधार पर पुलिस ने गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया

भातू जाति का था चंबल का डाकू सुल्ताना
नजीबाबाद का रहने वाला और चंबल का सुल्तान और गरीबों का रॉबिनहुड कहा जाने वाला डाकू सुल्ताना भी भातू जाति का ही था. चंबल में कई वर्षों तक डाकू सुल्ताना का एक छत्र राज रहा था. कहा जाता है कि डाकू सुल्ताना अपने चंबल के जीवनकाल में सिर्फ एक बार ही पकड़ा गया था और उसी दौरान उसे आगरा में फांसी भी दे दी गई थी. उसे एक अंग्रेज पुलिस अफसर ने गिरफ्तार किया था.
First published: July 13, 2017
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