खैरलांजी हत्याकांडः जब मुंबई के आजाद मैदान में हिंसक हो उठे थे 4000 दलित

News18Hindi
Updated: July 19, 2017, 11:38 AM IST
खैरलांजी हत्याकांडः जब मुंबई के आजाद मैदान में हिंसक हो उठे थे 4000 दलित
घटना के करीब 60 दिन बाद यानी 19 नवंबर, 2006 को मुंबई के आजाद मैदान में 4000 से अधिक दलितों ने इकट्ठा होकर खैरलांजी हत्याकांड के विरोध में प्रदर्शन किया. इसके अलावा कई अन्य जगहों पर हुए विरोध-प्रदर्शनों ने तो हिंसात्मक रुप भी अख्तियार कर लिया था और आरोप था कि पुलिस के ऊपर पत्थर भी फेंके गए.
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Updated: July 19, 2017, 11:38 AM IST
महाराष्ट्र के भंडारा जिले का एक छोटा सा खैरलांजी गांव दलित उत्पीड़न इतिहास की एक ऐसी इबारत है, जिसका महज जिक्र आज भी स्याह शब्दों में दर्ज है. कौन भूल सकता है  29 सितंबर, 2006 में रुह कंपा देने वाले इस जघन्य हत्याकांड को, जब खैरलांजी गांव के एक दलित परिवार के 4 सदस्यों को सरेआम मौत के घाट उतार दिया गया और उस परिवार की दो महिला सदस्यों की हत्या से पहले उनको पूरे गांव में नंगा घुमाया गया और आज ही के दिन 14 जुलाई, वर्ष 2010 में बंबई हाईकोर्ट की नागपुर पीठ द्वारा  दोषियों को 25 वर्ष सश्रम कैद की सजा सुनाई गई थी,

दलित परिवार की क्रूरतम हत्या
पुलिस रिपोर्ट कहती है कि यह हत्याकांड एक जमीन विवाद को लेकर पुलिस में दी गई तहरीर के खिलाफ प्रतिक्रिया भर थी. राजनीतिक हैसियत में दलितों से बेहतर रसूख रखने वाले हमलावरों ने सबक सिखाने के लिए एक पूरे दलित परिवार की क्रूरतम हत्या कर देता है. महाराष्ट्र के भंडारा जिले के खैरलांजी गांव के हमलावर पिछले समुदाय के कुनबी जाति से ताल्लुक रखते थे, जिन्होंने निजी खुन्नस में न्याय और कानून को जेब में रखकर एक दलित परिवार को खत्म कर दिया था.



महिलाओं को पूरे गांव में निर्वस्त्र घुमाया
कुनबी परिवार के हमलावरों ने उक्त दलित परिवार के साथ जघन्य अपराध किया था. उन्होंने परिवार के प्रत्येक सदस्यों को उनके घर से खींचकर सरेआम हत्या करने का दुस्साहस किया था और पीड़ित परिवार की घुमाने से गुरेज नहीं किया. करीब दो वर्ष चले वाद के बाद वर्ष 2008 में दोषी हमलावरों को सजा-ए-मौत की सजा मिली, लेकिन वर्ष 2010 में बंबई हाईकोर्ट ने मौत की सजा को पलटकर 25 वर्ष सश्रम कैद की सजा में बदल दिया.

पूरे महाराष्ट्र में दलितों का विरोध-प्रदर्शन
दलित परिवार के ऊपर बीती यह दुर्दांत दुर्घटना शायद ही प्रकाश में नहीं आ पाती अगर नागपुर में खैरलांजी हत्याकांड के खिलाफ दलितों में विरोध का ज्वार नहीं फूटा होता. खैरलांजी में हुए जघन्य हत्याकांड के खिलाफ महाराष्ट्र के विभिन्न भागों में विरोध-प्रदर्शन हुए. रिपोर्ट के मुताबिक घटना के करीब 60 दिन बाद यानी 19 नवंबर, 2006 को मुंबई के आजाद मैदान में 4000 से अधिक दलितों ने इकट्ठा होकर खैरलांजी हत्याकांड के विरोध में प्रदर्शन किया. इसके अलावा कई अन्य जगहों पर हुए विरोध-प्रदर्शनों ने तो हिंसात्मक रुप भी अख्तियार कर लिया था और आरोप था पुलिस के ऊपर पत्थर भी फेंके गए.

दंभ में की गई दलित परिवार की हत्या
पिछड़े समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कुनबी जाति के हमलावरों ने एक दलित परिवार के ऊपर यह एक आपराधिक कृत्य था. उन्होंने अपनी जमीन की रक्षा के लिए विरोध कर दलित परिवार की हत्या इसलिए कर दी थी क्योंकि उन्होंने हमलावरों के खिलाफ आवाज उठाई थी और उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की थी. यह राजनीतिक रसूख का ही दंभ था कि हमलावरों ने दलितों की जमीन हड़प कर उस जमीन पर जबरन सड़क निर्माण करवाना चाहते थे.

हमलावरों पर लगा था गैंगरेप का आरोप
रिपोर्ट कहती है कि हमलावरों को दलित परिवार द्वारा अपनी जमीन की रक्षा के लिए की गई पुलिसिया कार्रवाई पसंद नहीं आई थी और उसकी प्रतिक्रिया स्वरूप ही उन्होने एक 4 सदस्यों वाले पूरे दलित परिवार मौत के घाट उतार दिया गया था. इतना ही नहीं, हमलावरों पर उक्त दलित परिवार की दो महिला के साथ गैंगरेप करने का भी आरोप लगा था, जिनकी बाद बाद में हत्या कर दी गई थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उठे थे सवाल
खैरलांजी हत्याकांड को बाद में सीबीआई को सौंपा गया. सीबीआई टीम की जांच रिपोर्ट में कहा गया कि दलित महिलाओं के साथ गैंगरेप की वारदात नही हुई. फिर बाद में छुट पुट रिपोर्टों में कहा गया कि पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक को रिपोर्ट बदलने के लिए रिश्वत दिया गया था. यानी अभी तक दलित महिलाओं के साथ गैंगरेप की गुत्थी अनसुलझी है और पुलिस और प्रशासन की कार्रवाही पर सवालिया निशान लगा हुआ है.

मौत की सजा उम्रकैद में बदल गई
खैरलांजी हत्याकांड केस करीब दो वर्ष तक कोर्ट केस चला और सितंबर वर्ष 2008 में हमलावरों में शामिल 6 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई, लेकिन 14 जुलाई, 2010 को बंबई हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने दोषी ठहराए जा चुके हमलावरों की सजा-ए-मौत को पलटकर 25 वर्ष सश्रम कारावास में तब्दील कर दिया.
First published: July 14, 2017
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