कविताः कैसी कैफियत है मेरी...

अफसर अहमद | News18India.com
Updated: July 18, 2016, 1:17 PM IST
कविताः कैसी कैफियत है मेरी...
कविता सेक्शन में पढ़िए हिंदी समाचार चैनल IBN7 की वेबसाइट IBNKhabar.com के संपादक अफसर अहमद की कविता...
अफसर अहमद | News18India.com
Updated: July 18, 2016, 1:17 PM IST
कैसी कैफियत है मेरी, झुकने को तैयार नहीं।
शाम का घेरा बढ़ रहा है लेकिन रुकने को तैयार नहीं।।

झुका के फलक जमीं पर, नई इबारत लिखने का दिल है।
जो हो न सका उसको पूरा करने का दिल है...।।

कदम चल रहे हैं मेरे, इरादे फौलाद की तरह मजबूत हैं।
मुश्किलें चाहे जिस ओर मोड़ दे, लेकिन उम्मीदें मजबूत हैं।।

एक बार फिर वक्त से भिड़ जाने का दिल हैं।
जो हो न सका उसको पूरा करने का दिल है।।
First published: July 18, 2016
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर