पढ़ें योगी आदित्यनाथ के 'सबसे बड़े गुरु' बाबा गोरखनाथ की कविताएं

News18Hindi

Updated: March 20, 2017, 8:45 PM IST
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योगी आदित्‍यनाथ यूपी के नये सीएम बने हैं. वे गोरखपुर में स्‍थित नाथ संप्रदाय के संत, बाबा गोरखनाथ मंदिर/ मठ के महंत भी हैं. संत गोरखनाथ का जन्‍म 9वीं से 11वीं शताब्दी के बीच माना गया है. वे हठयोग और नाथ परंपरा के संस्‍थापक आचार्य मत्स्येन्द्रनाथ के शिष्य हैं. हालांकि नाथ संप्रदाय का विधिवत विस्‍तार गोरखनाथ ने ही किया. इस पंथ के साधकों  को योगी, अवधूत, सिद्ध, औघड़ कहा जाता है.

एक कवि के रूप में भी गोरखनाथ की ख्‍याति रही है. उनके उपदेशों में योग और शैव तंत्रों का सामंजस्य है. गोरखनाथ की अब तक गद्य-पद्य की 40 छोटी-मोटी रचनाओं का परिचय प्राप्त है. इनमें सबदी, पद, प्राण, संकली, नरवैबोध जैसे 13 ग्रंथ हैं. यह 'गोरख बानी के नाम से संकलित हैं. गोरखनाथ का प्रभाव इतना व्‍यापक था कि सूफियों की तरह इनकी ओर मुसलमान भी आकर्षित हुए.

पढ़ें योगी आदित्यनाथ के 'सबसे बड़े गुरु' बाबा गोरखनाथ की कविताएं
गोरखनाथ की अब तक गद्य-पद्य की 40 छोटी-मोटी रचनाओं का परिचय प्राप्त है. इनमें सबदी, पद, प्राण, संकली, नरवैबोध जैसे 13 ग्रंथ हैं. यह 'गोरख बानी के नाम से संकलित हैं.

गोरखनाथ की कविताएं/पद

हिन्दू ध्यावै देहुरा.

हिन्दू ध्यावै देहुरा.

मुसलमान मसीत

जोगी ध्यावै परम पद

जहां देहुरा न मसीत

कैसे बोलों पंडिता देव कौने ठाईं

कैसे बोलों पंडिता देव कौने ठाईं

निज तत निहारतां अम्हें तुम्हें नाहीं

पषाणची देवली पषाणचा देव,

पषाण पूजिला कैसे फीटीला सनेह

सरजीव तैडिला निरजीव पूजिला,

पापची करणी कैसे दूतर तिरिला

तीरथि तीरथि सनान करीला,

बाहर धोये कैसे भीतरि मेदीला

आदिनाथ नाती म्छीन्द्र्नाथ पूता ,

निज तत निहारे गोरष अवधूता

कुम्हरा के घर हांडी

कुम्हरा के घर हांडी आछे अहीरा के घरि सांडी

बह्मना के घरि रान्डी आछे रान्डी सांडी हांडी

राजा के घर सेल आछे जंगल मंधे बेल

तेली के घर तेल आछे तेल बेल सेल

अहीरा के घर महकी आछे देवल मध्ये ल्यंग

हाटी मध्ये हींग आछे हींग ल्यंग स्यंग

एक सुन्ने नाना वणयां बहु भांति दिखलावे

भणत गोरष त्रिगुंण माया सतगुर होइ लषावे

हिरदा का भाव हाथ मैं जानिये

हिरदा का भाव हाथ मैं जानिये

यहु कलि आई षोटी

बद्न्त गोरष सुनो रे अवधू

करवे होइ सु निकसै टोटी

हसिबा बेलिबा रहिबा रंग

काम क्रोध न करिबा संग

हसिबा षेलिबा गाइबा गीत

दिढ़ करि राषिबा अपना चीत

हसिबा षेलिबा धरिबा ध्यान

अहनिसि कथिबा ब्रह्म गियान

(कविता कोष से साभार)

First published: March 20, 2017
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