कौन हैं हॉकी प्लेयर बलबीर सिंह, कितने संघर्ष के बाद मिला था 'गोल्ड'?

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First published: January 13, 2017, 2:36 PM IST | Updated: January 13, 2017, 3:05 PM IST
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कौन हैं हॉकी प्लेयर बलबीर सिंह, कितने संघर्ष के बाद मिला था 'गोल्ड'?
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अभिनेता अक्षय कुमार एक और रियल स्टोरी पर आधारित फ़िल्म में काम कर रहे हैं. जिसका नाम है 'गोल्ड'. गोल्ड में अक्षय कुमार के साथ पहले फरहान अख्तर भी काम करनेवाले थे लेकिन  उन्होंने ये फिल्म छोड़ दी.

इस फिल्म की कहानी आजादी के बाद भारत के पहले गोल्ड मेडल जीतने और उसके संघर्ष की कहानी है. 1948 में भारत ने आज़ादी के बाद पहली बार किसी ओलंपिक में भाग लिया और उस समय के हालात क्या थे, फिल्म की कहानी इसी के इर्दगिर्द घूमती है.

इस फिल्म में सबसे खास बात है इंडियन हॉकी प्लेयर बलबीर सिंह. यह फिल्म उन्हीं की जिंदगी के बारे में है. बलबीर सिंह ने 1948,1952 और 1956. के ओलंपिक्स में गोल्ड मैडल जीते थे. अक्षय कुमार फ़िल्म में बलबीर की भूमिका निभाएँगे.

उन्हें बलबीर सिंह सीनियर एक अन्य हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह से अलग पहचान के लिए कहा जाता है.

बलबीर सिंह सीनियर भारतीय हॉकी टीम के मैनेजर और चीफ कोच 1975 में थे. उनके कोच रहते भारतीय टीम भारत ने पुरूषों का हॉकी वर्ल्डकप जीता. 1971 में भारत ने पुरूषों के हॉकी वर्ल्डकप में कांस्य पदक जीता. 2012 के लंदन ओलंपिक के दौरान, रॉयल ओपेरा हाउस के द्वारा सिंह का सम्मान किया गया.

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तीन बार के ओलिंपिक गोल्ड मेडल विजेता और गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करा चुके बलबीर सिंह सीनियर इन दिनों अपने खोए हुए मेडल को हासिल करने की जंग लड़ रहे हैं.

गुम हो गए हैं मेडल

दरअसल 1985 में उन्होंने अपने 36 नेशनल और इंटरनेशनल मेडल के अलावा 1956 ओलंपिक का कप्तानी का ब्लेजर स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) को म्यूजियम में रखने के लिए दिया था. इन मेडल्स में एशियन गेम्स का मेडल भी शामिल था लेकिन 2012 में जब बलबीर सिंह को लंदन में दुनिया के 16 आइकोनिक प्लेयर्स के सम्मान समारोह में सम्मानित करने के लिए अपने मेडल्स के साथ आने का बुलावा आया तो उन्हें पता चला कि उनके मेडल और ब्लेजर गुम हो गए हैं.

बलबीर ने लगाया साजिश का आरोप

पदमश्री बलबीर सिंह से जब बात की गई तो उनका गला भर आया. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि किसी ने मेरे शरीर के टुकड़े करके अलग-अलग फेंक दिए हैं. उन्होंने कहा, 'ऐसा लगता है कि ये कोई साजिश है. मेरा नाम इतिहास के पन्नों से मिटाया जा रहा है. मेरे 36 मेडल्स, मेरी दुर्लभ फोटो, मेरा ओलिंपिक की कप्तानी वाला ब्लेजर, सब ले लिए. वो अब कहां हैं, इसका जवाब किसी के पास नही है.

आपको बता दें बलबीर सिंह के पिता दलीप सिंह दोसांजा एक स्वतंत्रता सेनानी थे. बलबीर सिंह सीनियर की पत्नी सुशील लाहौर के पास के मॉडल टाउन की थीं. उनका विवाह 1946 में हुआ. उनके तीन बेटे और एक बेटी हैं. सभी कनाडा में बसे हुए हैं.

हेल्सिंकी ओलंपिक (1952) में सिंह टीम इंडिया के वाइस कैप्टन थे. के डी सिंह की कप्तानी में खेलते हुए ब्रिटेन के खिलाफ सेमीफायनल में सिंह ने हैट्रिक जमाई.

मैल्बोर्न ओलंपिक (1956) में भारतीय टीम के कप्तान थे. उन्होंने अफगानिस्तान के साथ ओपनिंग मैच में ही 5 गोल दागे परंतु फिर वे चोटग्रस्त हो गए. आखिर में वे सीधे सेमीफायनल में ही खेल पाए. फायनल में भी भारत पाकिस्तान के खिलाफ जीतकर टूर्नामेंट जीता. सिंह ऐसे पहले खिलाड़ी थे जिन्हें पद्मश्री से नवाजा गया.

भारत सरकार ने उन्हें यह अवार्ड 1957 में दिया. डोमिनिकन रिपब्लिक द्वारा जारी किए गए एक डाक टिकिट पर बलबीर सिंह सीनियर और गुरदेव सिंह थे. यह डाक टिकिट 1956 के मेलबोर्न ओलंपिक की याद में जारी किया गया था.

2006 में उन्हें सबसे अच्छा सिख हॉकी खिलाडी घोषित किया गया. 2015 में उन्हें मेजर ध्यानचंद लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया.

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