फिल्म समीक्षा: अश्लील फिल्म है ‘ग्रैंड मस्ती’

राजीव मसंद

Updated: September 14, 2013, 10:26 AM IST
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मुंबई। इंद्र कुमार द्वार निर्देशित ‘ग्रैंड मस्ती’ बेहद अश्लील है। और इस बात के लिए शर्मशार होना या माफी मांगना तो दूर, उल्टे इस फिल्म से जुड़ा हर इंसान इसके लिए गर्व महसूस करता है। ये फिल्म 2004 की ‘मस्ती’ की प्रिमाइस से मिलती-जुलती फिल्म है जिसमें तीन दोस्त अपनी पत्नियों से ऊब चुके हैं। इस सीक्वल में ये तीनों शादीशुदा दोस्त मीत यानी विवेक ओबरॉय, अमर यानी रितेश देशमुख, और प्रेम यानी आफताब अपनी कॉलेज रियूनियन में जाते हैं वो अपने पुराने दिनों को जीते हुए अपनी फ्रस्टेशन निकालना चाहते हैं।

इस फिल्म में कहीं-कहीं इन बकवास जोक्स के बीच कोई क्लेवर लाइन मिल जाए, आफताब इस बात की शिकायत करते रहते हैं कि उनकी बीवी तुलसी यानी मंजरी के पास उनके लिए बिल्कुल भी वक्त नहीं है। और वो अपने परिवार की इच्छाओं को पूरा करने में लगी रहती है। आफताब कहते हैं कि मेरी तुलसी मुझे छोड़कर पूरे आंगन की है। एक और सीन में अपने कॉलेज प्रिंसिपल की बीवी, बहन और बेटी के नामों रोज, मैरी और मारलो की तरफ इशारा करते हुए हमारे एक हीरो कहते हैं कि आपकी घर की औरतें के नाम कम और इनविटेशन ज्यादा लगते हैं। फिल्म में मेरा पसंदीदा जोक है, जब हमारे तीनों हीरो एयरपोर्ट पर अपने कॉलेज के दोस्त और उसकी बीवी से मिलते हैं, लेकिन उनके नाम नहीं याद कर पाते हैं। ये जोक काम करता है क्योंकि ये थोड़ा शरारती है और हर एक्टर ने इसे परफेक्ट टाइमिंग के साथ परफॉर्म किया है।

हमारे तीन-तीन हीरो के अपोजिट 6 हिरोइनों को कास्ट किया गया है और वो सभी इतनी स्टीरियो टाइप हैं कि उनमें से कोई याद रखने लायक नहीं है। ये फिल्म वल्गर विजुअल और जोक्स से भरी हुई है। सच्चाई तो ये है कि ये ग्रैंड मस्ती लगातार अश्लील है। रितेश और आफताब फनी हैं, वहीं विवेक कुछ ज्यादा ही मेहनत करते हैं। कड़वा सच है कि ये फिल्म पछताने पर मजबूर करेगी ना कि हंसाने पर। मैं इस फिल्म को 5 में से डेढ़ स्टार दूंगा। ये बेहद वल्गर है और इसे एडल्ट कॉमेडी कहना गलत होगा।

First published: September 14, 2013
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