फिल्म समीक्षा: बोर करती है नवाजुद्दीन की फिल्म 'हरामखोर'

शिखा धारीवाल | News18India.com

Updated: January 14, 2017, 3:43 PM IST
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मुंबई। लंबे इंतजार के बाद अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्धीकी की फिल्म 'हरामखोर' आखिर रिलीज हो गई। फिल्म की कहानी एक शादीशुदा स्कूल टीचर श्याम टेकचंद की है। श्याम का अफ़ेयर उसकी ही एक स्टूडेंट संध्या (श्वेता त्रिपाठी) से हो जाता है। वहीं स्कूल के बच्चों की एक टोली का लड़का कमल भी संध्या के प्यार में पागल है।

कमल संध्या से छोटा है और जब उसे संध्या और टीचर के अफ़ेयर के बारे में पता चलता हो तो वो अपने दोस्त से पूछता है - आखिर मुझमें क्या कमी है। कमल संध्या से प्यार का इजहार करने के लिए कई प्रयास करता है।

फिल्म की कहानी बहुत दिलचस्प और शहरी दर्शकों के लिए नई भी है। कॉमेडी भी नेचुरल है मगर अफसोस अपनी ढेर सारी कमियों के चलते -यह फिल्म एक बेहतरीन फिल्म बनने से रह गई।

फेस्टिवल सर्किट में घूमने के और कुछ अवॉर्ड हासिल करने के दो साल बाद बड़े जुगाड़ करके यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई है। हालांकि फिल्म का प्रोडक्शन और कैमरा क्वालिटी देखकर पता चलता है कि यह फिल्म चंदा मांगकर बनाई गई है।

यह अन्याय है 'हरामखोर' में बेहतरीन अभिनय करनेवाले कलाकारों के साथ मगर बीटीडीडी फिल्म फॉर्मूले पर जब हमने इसकी अच्छाईयों और कमियों को जांचा परखा तो हरामखोर को पांच में से सिर्फ आधे स्टार ही मिले। और वह भी अच्छी एक्टिंग, कुछ मासूम संवाद और अद्भुत विषय के लिए। वहीं फिल्म के प्रोडक्शन, कैमरा, स्क्रीनप्ले और कहानी में कमियां ही कमियां हैं। फ़िल्म का अंत भी बेहद अजीब है।

First published: January 13, 2017
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