रिव्यू: बोरिंग और थका देने वाली फिल्म है डिपार्टमेंट

News18India
Updated: May 19, 2012, 9:19 AM IST
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Updated: May 19, 2012, 9:19 AM IST
मुंबई। रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘डिपार्टमेंट’ में अगर कोई प्वाइंट है तो अफसोस मैंने उसे मिस कर दिया। हो सकता है कि उनके लगातार घूमते कैमरे की वजह से मेरा ध्यान फिल्म से भटक गया हो। माफिया से फेसिनेटेड वर्मा इस बार मुंबई पुलिस की उस स्पेशल यूनिट की वर्किंग स्टाइल को दिखाते हैं जो अंडरवर्ल्ड क्राइम को रोकने के लिए बनाई गई है।
फिल्म में संजय दत्त इंस्पेक्टर महादेव भोंसले के किरदार में हैं जो शार्प शूटर्स की इस टीम के हेड हैं और जिसे हर हाल में शहर में बढ़ रहे माफिया का सफाया करना है। राणा दागुबती एक ईमानदार कॉप और भोंसले के दाएं हाथ शिव नारायण के किरदार में हैं जो एक सनकी मिनिस्टर सरजी राव यानी अमिताभ बच्चन का दिल जीत चुका है।

वर्मा की इस टीम में और भी लोग शामिल हैं जैसे, हमेशा चीखता चिल्लाता डॉन सेवतिया, गर्म दिमाग डीके के किरदार में अभिमन्यु सिंह और मेरी फेवरेट फीमेल गैंगस्टर और डीके की खास मधु शालिनी जो लगातार उत्तेजनापूर्ण तरीके से या तो अपने लिप्स चबाती है या कुल्फी खाती रहती है। पुलिस अफसर एक-दूसरे को धोखा देते हैं, नेता अंडरवर्ल्ड से मिले होते हैं, यानी वही पुरानी कहानी। वर्मा फिल्म को कान फाड़ देने वाले बैकग्राउंड स्कोर के साथ-साथ कभी न खत्म होने वाले शूटआउट सीन और सबसे जरूरी जाना-पहचाना सा आइटम नंबर देते हैं।

इस फिल्म के लिए वर्मा ने कुछ फिल्म स्कूल स्टूडेंट को इकट्ठा कर उन्हें छोटे-छोटे कैमरे दिए हैं जिन्हे वो अलग-अलग जगहों पर रख कर शूट कर सकें। ये कहीं-कहीं ऐक्शन सीन्स में तो काम करते हैं पर फिल्म के ज्यादातर हिस्से में चारों ओर घूमता हुआ कैमरा आपको सिर दर्द दे सकता है।

करीब ढाई घंटे की फिल्म ‘डिपार्टमेंट’बहुत ही बोरिंग और थका देने वाली फिल्म है और इसमें सत्या और कंपनी जैसी कोई ओरिजनेलिटी नहीं है। संजय दत्त अपनी लाइंस कुछ इस तरह बोलते हैं मानो वो कोई फोनबुक पढ़ रहे हैं। बच्चन भी गैंगस्टर से मिनिस्टर बने अपने किरदार में कुछ खास नहीं लगते। फिल्म में वो राणा दागुबती हैं जो फिल्म को थोड़ा ईमानदारी से अप्रोच करते हैं। मैं रामगोपाल वर्मा की डिपार्टमेंट को पांच में से डेढ़ स्टार देता हूं। ये एक ऐसी लेजी फिल्म है जिसे देख आप अपना सिर धुनेंगे।
First published: May 19, 2012
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