रिव्यूः आपका दिल जीत लेगी ‘मालेगांव का सुपरमैन’

News18India
Updated: June 30, 2012, 8:41 AM IST
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Updated: June 30, 2012, 8:41 AM IST
नई दिल्ली। एक छोटे से हैंडीकैम और मजबूत स्पिरिट के साथ नासिर, मुंबई से कुछ दूर मालेगांव का एक गैरपेशेवर फिल्म मेकर है जो सुपरमैन की कहानी को अपने ही ढंग से बताने की कोशिश कर रहा है। फिल्म का नाम है मालेगांव का सुपरमैन, पर इन सबमें बहुत ही परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जैसे फिल्म को बनाने के लिए 50 हजार रुपये का इंतजाम। मुश्किल हालात में फंसी एक खूबसूरत लड़की का रोल निभाने के लिए एक लड़की को ढूंढना वो भी मालेगांव जैसे छोटे इलाके में और फिर सबसे जरूरी बात कि सुपरमैन को उड़ता हुए कैसे दिखाएं। अपनी चार्मिंग डॉक्यूमेंट्री सुपरमैन ऑफ मालेगांव में फैजा अहमद खान नासिर के अपने सपनों को पूरा करने के सफर को बहुत ही खूबसूरती से दिखाया गया है।

डॉक्यूमेंट्री की शुरुआत में नासिर इस बात से हैरान है कि बॉलीवुड फिल्म सेट में अलग-अलग काम करने के लिए इतने सारे लोगों को क्रेडिट क्यों दिया जाता है यहां तो वो शूट, डायरेक्ट और प्रोड्यूस यहां तक कि एडिट भी खुद ही कर रहा है। मजेदार बात ये है कि मार्केट से प्रॉप खऱीदने और सुपरहीरो सूट को डिजाइन कर वहां के लोकल टेलर को देने तक का काम वो खुद ही कर रहा है। उसके साथ कुछ गिने-चुने लोग भी हैं। एक राइटर जो सेट पर आकर एक्टर के साथ डायलॉग बोलता है और एक साउंड टेक्नीशियन, कम डबिंग आर्टिंस्ट कम स्पेशल इफैक्ट ऑल इन वन। जो नासिर की फिल्म में विलेन जैसा रोल निभाने के लिए गंजा तक हो जाता है।

उसका लीड एक्टर है एक ऐसा वर्कर जो मालेगांव में तंबाकू से लडने के लिए सुपरमैन का किरदार करते हुए कॉमिकली चार्ली चैप्लिन और मिस्टर बीन की तरह एक्ट करता चला जाता है। मालेगांव का सुपरमैन में इस छोटे से ग्रुप की लगन और उत्साह तारीफ के लायक है जो बस किसी न किसी तरह सुपरहीरो फिल्म बनाना चाहता है। करीब 65 मिनट की ये फिल्म मजेदार है जिसे देख आप मुस्कुराए बिना नहीं रह पाएंगे। अगर आप फिल्मों से प्यार करते हैं तो इस फिल्म के लिए वक्त जरूर निकालिए। मैं इस फिल्म को थम्स अप के साथ पांच में से साढ़े तीन स्टार देता हूं।
First published: June 30, 2012
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