रिव्यू: बेहद ही बोरिंग फिल्म है 'टोटल रिकॉल'

News18India
Updated: August 4, 2012, 9:22 AM IST
News18India
Updated: August 4, 2012, 9:22 AM IST
मुंबई। फिलिप के डिक की लघु कहानी और अरनॉल्ड श्वाजनेजर की 1990 की रीमेक ‘टोटल रिकॉल’ बेहद ही बोरिंग फिल्म है और इसमें इसकी पिछली फिल्म जैसा चार्म भी नहीं है।
फिल्म एक अजीबो गरीब घटना के इर्द गिर्द घूमती है जहां घरती पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है और सिर्फ यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ ब्रिटेन और उनकी कोलोनी ही बची है। इस फिल्म में कॉलिन फररेल डगलस कायेद के किरदार में है जो फैक्टरी में बहुत ही सुस्त सा काम करता है। जाहिर तौर पर डगलस और उसकी पत्नी लोरी यानि केट बेच्किंसले एक बेहतर जिंदगी का सपना देख रहे हैं। डौग रिकॉल नाम की कंपनी में जाता है जहां आपके दिमाग में किसी भी याद को फीड करने के पैसे लगते हैं और बस आप अपने दुख को भूल कर सपनों की दुनिया में जी सकते हैं।
निर्देशक लेन वाइसमैन स्पेशल इफेक्ट्स का बखूबी इस्तेमाल करते हुए कुछ जबरदस्त गैजेट, बहादुर सैनिक की सेना और पूरी तरह से बनाया गया ब्रहामांड देते हैं। निर्देशक पॉल वर्होएवन की पिछली फिल्मों से अलग यहां मंगल ग्रह के इर्द गिर्द घूमती काल्पनिक दुनिया नहीं है। कॉलिन फररेल बेहतरीन कलाकार हैं और यहां भी वो अपने किरदार को बिना झिझक निभाते हैं और केट बेच्किंसले को एक और मौका मिलता है अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए। बेच्किंसले और बील के बीच के लड़ाई के सीन इस तरह एडिट किए गए हैं कि इनको देखने का मजा कुछ कम हो जाता है।

मैं ‘टोटल रिकॉल’ को पांच में से दो स्टार देता हूं। ये फिल्म शायद उन्हें पसंद आए जिन्होंने इसका पिछला वर्जन नहीं देखा। बाकी इतनी कह सकते हैं कि इस फिल्म को भुलाने के लिए आपको किसी रिकॉल में नहीं जाना पडे़गा।

First published: August 4, 2012
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर