रिव्यू: बेहद निराश करती है ‘प्लेइंग फॉर कीप्स’

News18India

Updated: December 8, 2012, 10:51 AM IST
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नई दिल्ली। भला ऐसे कैसे हो सकता है कि इतने सारे चार्मिंग एक्टर्स के साथ एक ऐसी फिल्म बनाई जाए जो आसानी से भुलाई जा सके। ये एक ऐसा विचार है जो "प्लेइंग फॉर कीप्स" देखते वक्त बार-बार आपके दिमाग में आएगा कि ये कॉमेडी अपनी जानी पहचानी स्क्रिप्ट के साथ इसकी बेहतरीन कास्ट के टैलेंट का पूरा-पूरा फायदा उठाने में नाकाम रहती है।

जॉर्ज ड्रायर के किरदार में गेरार्ड बटलर किसी जमाने के सॉकर स्टार हैं जो अपनी पूर्व पत्नी जेसिका बायल और 9 साल के बेटे के साथ बिगड़ी बातों को सुधारने वर्जीनिया आते हैं। पूरी तरह से टूट चुका जॉर्ज अपने बेटे की सॉकर टीम का कोच बनाने का फैसला लेता है लेकिन उसे पता चलता है कि वो उन बच्चों की मम्मियों के बीच बेहद लोकप्रिया है जो बेशर्मी से उससे चांस मारने की कोशिश करती है। इनमें शामिल है हमेशा चिपकने वाली तलाकशुदा जूडी ग्रीर, एक अमीर हाउसवाइफ उमा थुर्मन जो बिना प्यार के शादी में उलझी हुई है और एक ऊपर तक पहुंच रखने वाली महिला कैथरीन जेटा जोन्स जो जॉर्ज को ईएसपीएन में काम दिलाने का ऑफर देती है।

हालांकि इस हंकी कोच को लुभाने में इन सॉकर मॉम्स की कोशिशें फिल्म को कुछ हंसी जरुर देती हैं, लेकिन ड्रायर का इन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज करना उतना विश्वसनीय नहीं लगता क्योंकि फिल्म की शुरुआत में ही उसके एक दोस्त के एक कमेंट से ड्रायर की रंगीनमिजारी की झलक मिल जाती है। फिल्म में अगर कुछ असली मोमेंट्स हैं तो वो हैं बटलर और उसके बेटे के किरदार में नोहा लोमेक्स के बीच जिनकी कैमिस्ट्री बेहद चार्मिंग और विश्वसनीय लगती है।

बटलर की भावुक पूर्व पत्नी के किरदार में बायल ईमानदार परफॉर्मेंस देती हैं। लेकिन उनका किरदार इतना कमजोर है कि वो इसमें कुछ खास नहीं कर पातीं। खुद बटलर भी इतने बुरे नहीं हैं लेकिन फिल्म की स्क्रिप्ट जिसमें वो इन सभी मुश्किलों से बड़ी आसानी से बाहर निकल आते हैं। आपके उनके किरदार के साथ सहानुभूति रखने से रोकते हैं। मैं इस फिल्म को 5 में से 2 स्टार देता हूं। ये उतनी बुरी फिल्म नहीं है पर ये उतनी देखने लायक भी नहीं है। असल में ये एक डल फिल्म है जो इसमें शामिल कलाकारों के लिए शर्मनाक है।

First published: December 8, 2012
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