Film Review: बेहद ख़ास फ़िल्म है पूर्णा !

Sushant Mohan | News18Hindi
Updated: March 30, 2017, 4:48 PM IST
Film Review: बेहद ख़ास फ़िल्म है पूर्णा !
फ़िल्म पूर्णा की स्टार कास्ट (साभार- क्रिस्पी बॉलीवुड)
Sushant Mohan | News18Hindi
Updated: March 30, 2017, 4:48 PM IST
भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी विडंबना है कि यहां वो फ़िल्में तो काम करती हैं जिनमें भले ही काल्पनिक कहानी हो लेकिन सुपरस्टार मौजूद हों.

ज़िंदगी के असली पहलू को दिखाती हुई फ़िल्में जैसे पूर्णा न तो ठीक से रिलीज़ ही हो पाती हैं और न ही उन्हें दर्शक मिलते हैं.

13 साल की उम्र में भारत की ओर से माउंट एवरेस्ट फ़तह करने वाली तेलंगाना राज्य की पूर्णा मालावथ की ज़िंदगी पर आधारित इस फ़िल्म में जिस सटीकता से हमारे सरकारी शिक्षा तंत्र और सामाजिक स्थितियों पर चोट की गई है वो कमाल है.

एक डेकोरेटेड आईपीएस ऑफ़िसर सोशल वेलफ़ेयर विभाग में अपने ट्रांसफ़र की गुहार लगाता है.

वो सरकारी स्कूलों में मिलने वाले खाने, शिक्षा के स्तर, घोटालों, दलालों से भिड़ता है और एक तरफ़ कहानी सरकारी तंत्र की कमज़ोरियों पर कड़ा प्रहार करती है, वहीं दूसरी तरफ़ भारत के सबसे गरीब गाँव में मौजूद लड़कियों की कहानी भी कहती है.

कैसे स्कूल में फ़ीस भरने से बेहतर माँ बाप कम उम्र में ही लड़कियों की शादी करना ज़्यादा ठीक समझते हैं.

फ़िल्म में कई दृश्य ऐसे हैं जो आपके दिल को छू जाएंगे और हंसते हुए किरदार सिनेमा की गद्देदार सीट में धंसे आपके मन को परेशान कर जाएंगे.

मसलन एक दृश्य है जहां छोटी लड़कियों का एक समूह, एक खेल के दौरान अपनी गरीबी की सीमाओं को बता रहा है.

वो दृश्य न सिर्फ़ कड़वे सत्य को सामने लाता है, वो कहीं न कहीं दिखाता है कि अभी भी विकास देशभर तक नहीं पहुंच पाया है.

फ़िल्म का अच्छा पहलू है कि किसी भी राजनीतिक कटाक्ष से दूर रहते हुए राहुल ने दिखाया है कि कैसे सरकार और अधिकारियों के सामने भी बड़ी चुनौतियां होती हैं और जो आम लोगों को नहीं दिखती.

फ़िल्म पर्वतारोहण पर आधारित है और इस मामले में हॉलिवुड की फ़िल्मों की बराबरी करती है.

पहाड़ पर चढ़ना कितना मुश्किल और जोखिमभरा काम है, पूर्णा में राहुल बोस बखूबी दिखाते हैं, हालांकि इस फ़िल्म को देखते हुए आपको शिवाय भी याद आ सकती है जिसमें अजय देवगन बिना किसी मदद के ऊँचे ऊँचे पहाड़ों से कूदते चले आते हैं.

विडंबना यही है कि दर्शकों को उसी सिनेमा में मज़ा आता है और रिएलिस्टिक लेबल वाली फ़िल्मों को दर्शक तो दूर सिने स्क्रीन ही नसीब नहीं हो पाती.

अभिनय के मामले में राहुल बोस ने कमाल की एक्टिंग की है और वो एक सॉफ़्ट स्पोक्न अधिकारी के रोल में जान डाल देते हैं.

पहाड़ चढ़ने वाली पूर्णा के किरदार में अदिति ईनामदार और उनकी सहेली एस प्रिया ने जनजातीय लड़कियों और उनकी झिझक को अच्छे से दिखाया है.

फ़िल्म की गति थोड़ी धीमी लग सकती है और क्लाईमैक्स थोड़ा नाटकीय लेकिन वो घटनाएं उतनी ही सच्ची हैं जितने इस फ़िल्म को इंस्पायर करने वाले लोग.

फ़िल्म - पूर्णा
निर्देशक - राहुल बोस
कास्ट - अदिति ईनामदार,राहुल बोस
रेटिंग - ***1/2 स्टार
First published: March 30, 2017
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