फिल्म प्रिव्यू: गांधी के रास्ते पर चलना सिखाएगी ‘गांधीगिरी’

दीपक दुआ | News18India.com
Updated: October 17, 2016, 5:11 PM IST
फिल्म प्रिव्यू: गांधी के रास्ते पर चलना सिखाएगी ‘गांधीगिरी’
‘गांधीगिरी’-राजकुमार हिरानी की फिल्म ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ से लोकप्रिय हुए इस शब्द का असर इस फिल्म के बाद समाज में काफी देखने को मिला।
दीपक दुआ | News18India.com
Updated: October 17, 2016, 5:11 PM IST
नई दिल्ली। ‘गांधीगिरी’-राजकुमार हिरानी की फिल्म ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ से लोकप्रिय हुए इस शब्द का असर इस फिल्म के बाद समाज में काफी देखने को मिला। जहां कहीं भी किसी ने सत्याग्रह, अहिंसा और विनम्रता के रास्ते को अपनाया तो कहा गया कि वह गांधीगिरी कर रहा है। और अब इसी नाम की एक हिन्दी फिल्म 21 अक्टूबर को रिलीज होने जा रही है, जिसमें गांधी के विचारों और उनके रास्ते पर चलने की सीख को मनोरंजक तत्वों के माध्यम से कहने की कोशिश की गई है।

फिल्म के निर्देशक सनोज मिश्रा हैं जो कई भोजपुरी फिल्में बना चुके हैं। सनोज कहते हैं, ‘गांधी जी के दिखाए हुए रास्ते हमेशा प्रासंगिक रहे हैं और रहेंगे। आज के समय में जब हम हर तरफ फैली भ्रष्टाचार से त्रस्त हैं, गांधी और उनकी सिखाई गांधीगिरी कितनी जरूरी है, यह फिल्म इसी की बात करती है।

ओम पुरी, संजय मिश्रा, मुकेश तिवारी, अनुपम श्याम ओझा, मेघना हल्दर, डॉली चावला, ऋषि भुटानी जैसे कलाकारों वाली इस फिल्म में साहिल रैयान और शिवम पाठक का म्यूजिक है। अभिनेता ओम पुरी कहते हैं, ‘गांधी जी ने कहा था कि बुराई को बुराई से खत्म नहीं किया जा सकता। यही गांधीगिरी है।’ वहीं अभिनेता संजय मिश्रा का कहना है, ‘जब शरीर में कोई बीमारी होती है तो हमें दवा की जरूरत पड़ती है। उसी तरह से जब समाज में कोई बीमारी फैलती है तो हमें दवा रूपी विचारों की जरूरत पड़ती है और गांधी जी के विचार हमेशा से ही समाज के लिए दवा का काम करते आए हैं।’

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अभिनेता अनुपम श्याम बताते हैं कि इस फिल्म में स्वर्गीय कवि चंद्रेश सिंह ‘पागल’ के लिखे एक गीत ‘क ख ग घ ङ, झंडा है तिरंगा, च छ ज झ ञ, हम है भारतीय...’ का बहुत ही खूबसूरती के साथ इस्तेमाल किया गया है। फिल्म के निर्माताओं सुधीर जैन और प्रताप सिंह यादव में से प्रताप का कहना है कि इस फिल्म में भले ही गांधी और उनके मूल्यों की बात की गई हो, लेकिन यह आज के दौर की, आज के दर्शकों को पसंद आने वाली कहानी है जिसमें मनोरंजन को प्रमुखता दी गई है।



(वरिष्ठ फिल्म समीक्षक व पत्रकार दीपक दुआ 1993 से फिल्म-पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मिजाज से घुमक्कड़। सिनेमा विषयक लेख, साक्षात्कार, समीक्षाएं व रिपोर्ताज लिखने वाले दीपक कई समाचार पत्रों, पत्रिकाओं के लिए नियमित लिखते हैं और रेडियो व टीवी से भी जुड़े हुए हैं।)
First published: October 17, 2016
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