मूवी रिव्यू: एक्शन मूवी के दीवाने हैं तो देखें 'शिवाय'

राजीव मसंद | News18India.com

Updated: October 29, 2016, 3:20 PM IST
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नई दिल्ली। अजय देवगन की 'शिवाय' हॉलीवुड फिल्म 'टेकन' की कॉपी है और उस में मिलाया गया है खूब सारा मेलोड्रामा और खूब बातचीत। हद से ज़्यादा बात-चीत। ज्यादातर एक्शन फिल्मों में डायलॉग के लिए जगह नहीं होती है। इन फिल्मों में लात घूंसे और गोलियां ही बात करती है लेकिन 'शिवाय' महज एक्शन मूवी रहने में संतुष्ट नहीं है। ये एक इमोशनल कहानी बताना चाहती है जो एक सिंगल पेरेंट और उसकी बच्ची के बीच के रिश्ते की है।

ये फिल्म इंटेरनेशनल चाइल्ड ट्रैफिकिंग जैसे गंदे बिजनेस को एक्सपोज भी करती है, पर इस फिल्म का कोर एजेंडा है इसके लीडिंग मैन को दिखाना। एक ही फिल्म के लिए ये बहुत सारे एजेंडा हैं और इसका नतीजा ये है कि करीब 2 घंटे 52 मिनट की फिल्म 'शिवाय' आपके दिमाग को सुन्न कर देती है। साफ शब्दों में कहें तो  इतनी देर में तो लीयम नीसन ने 'टेकन' में अपनी बेटी और 'टेकन 2' में अपनी पत्नी और बच्चे दोनों को बचा लिया था। ये दोनो ही फिल्में करीब डेढ़ घंटे की ही थी।

मूवी रिव्यू: एक्शन मूवी के दीवाने हैं तो देखें 'शिवाय'
अजय देवगन की 'शिवाय' हॉलीवुड फिल्म 'टेकन; की कॉपी है और उस में मिलाया गया है खूब सारा मेलोड्रामा और खूब बातचीत।

इस फिल्म की लंबाई शायद इतनी बड़ी प्रॉब्लम नहीं होती अगर ये इतनी बोरिंग नही होती। जाहिर तौर पर फिल्म का कुछ एक्शन बहुत ही प्रभावशाली है हैंड हेल्ड कैमरे से शूट किए गए चक्कर दिलाने वेल कार चेसस, और फ्री रेंज फाइट्स पर ये सब एक ऐसे प्लॉट को बढ़ते हैं जो पूरी तरह से संभावित है और जिसमे कोई दम नहीं है।

अजय देवगन, जो खुद इस फिल्म के निर्देशक भी हैं, वो शिवाय के किरदार में हैं, एक बेचैन पिता, जिसकी 8 साल की गूंगी बेटी बुल्गारिया में उनके साथ एक ट्रिप के दौरान किडनैप हो जाती है, और उसे बचाने के लिए शिवाय पहाड़ तक पार कर जाता है। लेकिन फिल्म का यह साधरण पर सशक्तपूर्ण अजय देवगन का किरदार और उस बच्ची की मां की बैकस्टोरी के नीचे इस कदर दब के रह जाता है कि आप समझ नहीं पाते की आप हंसे या रोयें। फिल्म में सपोर्टिंग कैरेक्टर को हद से ज्यादा स्क्रीन टाइम दिया गया है।

शिवाय की बेटी को ढूंढने में मदद कर रही एंबेसी की एंप्लॉइ पर फिल्माया गया एक पूरा बाथ टब सॉन्ग और फिर फिल्म में ऐसे किरदार भी हैं जिनका कोई काम नही है। शिवाय खुद बहुत ही अनोखा किरदार है।  खतरों से खेलने वाला, ऊंचे ऊंचे पहाड़ फांदने वाला जो हमेशा खुद को थर्ड पर्सन के तौर पर रेफर करता है और जो सिर्फ  पंच लाइन में बात करता है। फिल्म की कमजोर राइटिंग के बावजूद भी अजय देवगन अपने किरदार को इंसानियत से भरते हैं और उनकी बेटी से जुड़ा होने के उनके दर्द को आप महसूस कर सकते हैं।

वो 'सुपरहीरो' मोड में भी प्रेरणादायक लगते हैं, जो उकसाए जाने पर क्रोध से पागल हो जाते हैं, तेज गति से किक्स और पंच मारते हैं, यहां तक की बिना पैडल पर पैर रखे ड्राइव भी कर लेते हैं और हार मार और गोली से खुद को बचा लेते हैं।

जिन चीजों की अजय देवगन 'द स्टार' को जरूरत थी, वो है बेहतर डायरेक्टर और बेहतर स्क्रिप्ट की। अंत में 'शिवाय' में खूबसूरत जगहों, अजय देवगन और उनकी बेटी के बीच बिताए गए कुछ नर्म पलों को छोड़ कर देखने लायक ज्यादा कुछ नहीं है। बाकी सब सिर्फ शोर है। कुछ ज्यादा ही शोर।

मैं 'शिवाय' को पाँच में से दो स्टार देता हूं।

रेटिंग 2 / 5

First published: October 29, 2016
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