कभी मिट्टी बेचकर करते थे गुजारा, अब हॉलीवुड के 'हीरो' बन गए बिहार के प्रभाकर!

स्मिता चंद | News18India.com

Updated: December 31, 2016, 11:55 AM IST
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नई दिल्ली। बिहार के छोटे से शहर मोतिहारी में पैदा हुए प्रभाकर शरण आजकल की युवा पीढ़ी के लिए एक मिसाल हैं। बचपन से हीरो बनने का सपना देखने वाले प्रभाकर की ख्वाहिश जब बॉलीवुड में पूरी नहीं हुई, तो उन्होंने अमेरिका का रूख किया। प्रभाकर ने सालों की लगन और मेहनत से हॉलीवुड तक का सफर तय किया और जल्द ही बतौर लैटिन अमेरिकी फिल्म में बतौर हीरो नजर आने वाले हैं।

प्रभाकर शरण की कहानी बॉलीवुड की फिल्म से कम नहीं है। एक गरीब परिवार का लड़का अनजान देश में जाता है, जिसे रोजी रोटी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। अपने बचपन का सपना पूरा करने के लिए वो अपनी सारी दौलत और ताकत लगा देता है। प्रभाकर की मेहनत का फल उन्हें मिला और जल्द ही उनकी फिल्म 'एंटैंगल्ड : द कंफ्यूजन' रिलीज होने वाली है। वो किसी लैटिन अमेरिकी फिल्म में काम करने वाले पहले भारतीय अभिनेता हैं। प्रभाकर से न्यूज 18 इंडिया डॉट कॉम ने खास बातचीत की पेश है बातचीत के कुछ अंश-

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सवाल: 'एक छोटे से शहर का लड़का कैसे हॉलीवुड का हीरो बन गया?

जवाब: मैं मिडिल क्लास फेमिली से था मुझे यहां आने के बाद 17 सालों तक कड़ी मेहनत करनी पड़ी। बस दिल में हौसला था कि कुछ करना है। यहां आने के बाद मुझे आर्थिक रूप से, मानसिक रूप से हर तरह से परेशानी उठानी पड़ी। ये सफर मेरे लिए काफी मुश्किल था, लेकिन मैंने हार नहीं मानी।

सवाल: एंटैंगल्ड: द कंफ्यूजन किस तरह की फिल्म है? क्या इसमें बॉलीवुड का तड़का भी होगा?

जवाब: ये फिल्म पहली ऐसी लैटिन फिल्म है, जो टिपिकल बॉलीवुड स्टाइल में है, इस फिल्म में कॉमेडी है एक्शन है, बॉलीवुड स्टाइल डांस है, इसे आप पूरे परिवार के साथ देख सकते हैं। इस फिल्म में कोई बोल्ड सीन नहीं है, एक साफ सुधरी कहानी है। हीरो चोरी करने गया और वहां हिरोइन से मुलाकात हो गई, हीरो-हिरोइन को एक दूसरे से प्यार हो गया। बीच-बीच में गोलियां भी चलती हैं और गाने भी आते हैं। इस फिल्म की कहानी मैंने अपने बुरे दिनों में लिखी थी। मुझे उम्मीद है कि लोग इसे पसंद करेंगे।

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सवाल: बिहार से सीधे कोस्टारिका कितना मुश्किल रहा ये सफर?

जवाब: बिहार से कोस्टारिका का सफर मेरे लिए काफी मुश्किल रहा, मुझे याद है कि पटना में पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने सोनीपत में एडमिशन कराया। सोनीपत में मैंने रेसलिंग सीखी, मैं वहां अखाड़ों में जाता था और कुश्ती लड़ता था। उसी दौर में मैं अपने दोस्त राकेश से मिला, जिसने मुझे विदेश में पढ़ाई का सुझाव दिया। कोस्टारिका में आकर मुझे काफी दिक्कत हुई, मुझे हरियाणा में बाजरे की रोटी, सरसों का साग और मक्खन खाने की आदत थी, लेकिन यहां तो रोटी भी नहीं मिलती थी। मुझे खाने से लेकर काम करने तक, हर चीज में दिक्कतें आईं। कई बार वापस जाने का भी सोचा, लेकिन घरवालों के सपनों को तोड़ना नहीं चाहता था। मैंने कमाई के लिए हरियाणा की मिट्ठी का सहारा लिया और वहां से 100 रुपए मिट्टी मंगाकर यहां 1000 रुपए में बेचने लगा। धीरे-धीरे मेरा कारोबार बढ़ा और मैंने अपने कई स्टोर खोले। बिजनेस तो जम गया, लेकिन मेरा सपना था बॉलीवुड में चमकने का, तो धीरे-धीरे मैंने बॉलीवुड की फिल्में खरीदनी शुरू की। मैंने पहली बॉलीवुड की फिल्म यहां रिलीज कराई, हालांकि मुझे इससे कोई फायदा नहीं होता था बल्कि नुकसान ज्यादा होता था।

सवाल: आपने बॉलीवुड में किस्मत नहीं आजमाई?

जवाब: जब मैं 10वीं था तब मैं मुंबई में गया और जब 12वीं में था, तब भी मैंने फिल्मों में किस्मत आजमाने की कोशिश की। मैंने एक बार मनोज वाजपेयी के पिता से सिफारिश के लिए चिट्ठी भी लिखवाई, लेकिन मनोज अपने करियर में बिजी थे, इसलिए उनसे कोई मदद नहीं मिली। फिल्मों में काम करने का मौका नहीं मिला तो मैंने विदेश जाकर पढ़ाई करने का फैसला किया।

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सवाल: आपको बिजनेस में काफी नुकसान भी झेलना पड़ा?

जवाब: एक वक्त ऐसा भी आया कि बॉलीवुड से प्यार के चक्कर में मेरा पूरा बिजनेस डूब गया, मेरी दुकानें तक बिक गईं। हालात ऐसे हुए कि मैं सड़क पर आ गया और मुझे अपनी पत्नी और बच्चों के साथ पंचकुला जाना पड़ा। पंचकुला में मैंने टिकवुड का बिजनेस शुरू किया और मैंने फिर से बॉलीवुड में किस्मत आजमाने की कोशिश की। मैं बहुत सारे नेताओं से भी मिला, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। इस बीच मेरी पत्नी मेरी बेटी को लेकर मुझे छोड़कर चली गई। एक वक्त ऐसा था जब मैं डिप्रेशन में चला गया, उसी दौरान मैंने सपने में अपनी बेटी को देखा जिसने मुझे कहा कि पापा यू आर माई हीरो। ये सपना देखने के बाद मैंने खुद को संभाला और फिर काम करना शुरू किया। वहीं मैंने अपनी फिल्म की स्क्रिप्ट लिखनी शुरू की। आखिर मेरी मेहनत काम आई और मेरी फिल्म जल्द ही लोगों के सामने होगी।

सवाल: आप बॉलीवुड में कब नजर आएंगे?

जवाब: इस फिल्म के बाद मैं कोशिश करूंगा कि मुझे बॉलीवुड में भी अच्छा रोल मिले। भले ही मुझे 17 साल लगे, लेकिन मैंने अपनी मेहनत के बल पर फिल्म बनाई। मैं बॉलीवुड में भी काम करने की कोशिश करूंगा।

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सवाल: आप देश के कई युवाओं के लिए रोल मॉडल बन गए हैं, आप देश के युवाओं को क्या संदेश देना चाहते हैं?

जवाब: मैं युवाओं को यहीं कहूंगा कि गलत काम मत करो, मेहनत करो तुम्हें जरूर कामयाबी मिलेगी। अगर एक रास्ता बंद हो, तो दूसरा तुम खोलो। कोशिश करोगे तो सफलता जरूर मिलेगी भले ही कुछ सालों के बाद मिले। अगर तुममें क्षमता है तो तुम्हारे सपने जरूर पूरे होंगे।

First published: December 29, 2016
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