'गोरे रंग पर गुमान, काला रंग बदनाम...', दिखाती है ये फिल्म...

स्मिता चंद | News18India.com

Updated: November 23, 2016, 2:43 PM IST
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नई दिल्ली। हमारे देश में हर साल छोटे बड़े बजट की हजारों फिल्में बनती हैं, जिनमें कुछ ही फिल्में ऐसी होती हैं, जिसे लोग याद रखते हैं। एक ऐसी ही छोटे बजट की फिल्म है 'पिंकी ब्यूटी पार्लर' जिसे मामी फिल्म फेस्टिवल, कांस फिल्म फेस्विटल और गोवा फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया, इस फिल्म को जिसने भी देखा इसकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाया, हांलाकि फंड की कमी की वजह से ये फिल्म अभी थिएटर तक नहीं पहुंच पाई है, जिसे आम लोग देख सके, लेकिन यूट्यूब पर फिल्म के ट्रेलर को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। ये फिल्म हमारे समाज में सालों से चले आ रहे काले-गोरे रंग के बीच के भेदभाव को दर्शाती है। हमारे देश में लोगों के अंदर गोरा दिखने की चाहत को इस फिल्म में बड़े कॉमिक तरीके से दिखाया गया। इस फिल्म के एक्टर, राइटर, डायरेक्टर, और प्रोड्यूसर अक्षय सिंह ने न्यूज 18 इंडिया डॉट कॉम से बात की। पेश है बातचीत के अंश।

सवाल: 'पिंकी ब्यूटी पार्लर' किस तरह की फिल्म है?

'गोरे रंग पर गुमान, काला रंग बदनाम...', दिखाती है ये फिल्म...
गोवा फिल्म फेस्टिवल में जहां एक और 'सुल्तान', 'बाजीराव मस्तानी' और 'एयरलिफ्ट' जैसी बड़े बजट की हिंदी फिल्में दिखाई जा रही हैं, वहीं एक छोटे बजट की फिल्म 'पिंकी ब्यूटी पार्लर' भी दिखाई गई।

जवाब: हमारे देश में लोगों के अंदर जो गोरा दिखने की चाहत है, मैं बचपन से ही देखता आया हूं कि लोग किस तरह से गोरे लोगों को महत्व देते हैं। हमारी फिल्म भी इसी सब्जेक्ट पर बनाई गई है। 'पिंकी ब्यूटी पार्लर' दो बहनों पिंकी और बुलबुल की कहानी है, जिसमें एक गोरी है और दूसरी सांवली, जो वाराणसी में एक ब्यूटी पार्लर चलाती हैं। ये एक कॉमेडी फिल्म है, जो हमारे समाज के अंदर की इस बुराई पर व्यंग भी करती हैं। इस फिल्म की लीड हिरोइन भी एक बेहतरीन अदाकारा है, लेकिन उसके सांवले रंग की वजह से उसे काम नहीं मिल रहा था।

सवाल: आपके फिल्म के लिए ये सब्जेक्ट ही क्यों चुना?

जवाब: इस फिल्म की कहानी मेरे अपने अनुभव पर आधारित हैं। मेरी जिंदगी में कुछ लोग ऐसे थे जो गोरे होने की चाह में डिप्रेशन में चले गए। मैं कई ऐसे लोगों को जानता हूं, जो 20 सालों से फेयर एंड लवली लगा रहे थे कि वो गोरे हो जाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। हमारे देश में फेयरनेस क्रीम का कारोबार करीब 3 हजार करोड़ का है, इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारे देश में गोरा होना कितना मायने रखता है। मेरी पत्नी का रंग भी सांवला है, इसको लेकर भी कई बार लोगों ने कमेंट किया। मेरी शादी में आए मेहमानों ने भी कहा कि दुल्हन का रंग थोड़ा दबा हुआ है। मैं कई सालों से यही सोच रहा था कि अगर में फिल्म बनाऊंगा तो इसी टॉपिक पर बनाऊंगा और जब मुझे मौका मिला तो मैंने इसी विषय पर फिल्म बनाई।

सवाल: आपने फिल्म के लिए बनारस को ही क्यों चुना?

जवाब: मैं खुद गाजीपुर का रहने वाला हूं और मैंने अपनी जिंदगी के कई साल यहीं गुजारा है, इसलिए मैंने ये शहर चुना। मैंने बचपन से देखा कि यहां लोगों के अंदर रंग को लेकर कितना भेदभाव है। गाजीपुर जैसे छोटे से शहर में हर 2 किलोमीटर पर एक पार्लर है, लोग पार्लर में खासतौर पर गोरे होने के लिए जाते हैं। इसलिए मुझे लगा कि इस फिल्म की कहानी क्यों ना एक पार्लर के ईर्द-गिर्द बुनी जाए।

सवाल: इस फिल्म को बनाने में कितनी मुश्किल आई?

जवाब: मैंने इस फिल्म के लिए काफी रिसर्च किया। करीब 2 सालों के रिसर्च के बाद हमने ये कहानी फाइनल की। मैंने इस फिल्म के लिए जिस स्टारकास्ट को चुना वो भी काफी बेहतरीन हैं, जब मैंने उनको कहानी सुनाई तो वो लोग इस फिल्म में काम करने के लिए तुरंत तैयार हो गए। सबसे मुश्किल था इस फिल्म के लिए प्रोड्यूसर की तलाश करना। मैं कई लोगों से मिला उनको टीजर दिखाया, लेकिन उन लोगों ने सोचने के लिए वक्त मांगा फिर मैंने और मेरी पत्नी ने खुद ही इस फिल्म को प्रोड्यूस करने का फैसला किया।

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सवाल: आपकी फिल्म को मामी फिल्म फेस्टिवल में भी सराहा गया, थिएटर में कब रिलीज होगी?

जवाब: मैंने और मेरी पत्नी ने हमारी सारी पूंजी इस फिल्म में लगा दी और अब थिएटर में रिलीज करने के लिए फंड इक्ट्ठा कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि जल्द ही ये फिल्म थिएटर के माध्यम से आम लोगों तक भी पहुंचे।

सवाल: हमारे देश में कई ऐसी फिल्में आती हैं, फेस्टिवल्स में सराही जाती हैं, लेकिन थिएटर तक क्यों नहीं पहुंच पाती है?

जवाब: हमारे देश में सबसे बड़ी दिक्कत है कि यहां लोग या तो बड़े बैनर की फिल्में देखते हैं या बड़े स्टार की। किसी फिल्म को हिट कराने के लिए प्रमोशन भी बेहद जरूरी होता है, जिसके लिए ज्यादा पैसे की जरूरत होती है। हालांकि हम सोशल मीडिया और यूट्यूब जरिए फिल्म को प्रमोट कर रहे हैं, मुझे उम्मीद है कि लोगों को पता चलेगा तो मेरी फिल्म जरूर देखेंगे। मामी फिल्म फेस्टिवल में जिस तरह से इस फिल्म की तारीफ की गई वो मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

First published: November 23, 2016
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